ओस्लो/नई दिल्ली, 19 मई (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे का मंगलवार को दूसरा और बेहद अहम दिन है। प्रधानमंत्री ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्रियों के साथ भारत के संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री की यह नॉर्वे की पहली यात्रा मानी जा रही है और इसे भारत-नॉर्डिक रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते व्यापार, हरित ऊर्जा, तकनीक और निवेश सहयोग के बीच यह शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। वर्ष 2022 में कोपेनहेगन में हुए दूसरे भारत-नॉर्डिक सम्मेलन के बाद यह पहला बड़ा मंच है, जहां दोनों पक्ष पूर्व समझौतों और साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, हरित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लू इकॉनमी, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। भारत नॉर्डिक देशों की तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश क्षमता को अपने विकास कार्यक्रमों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन से इतर आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडोटिर के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान स्वच्छ ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, मत्स्य क्षेत्र, टिकाऊ विकास और कार्बन कैप्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने ब्लू इकॉनमी में आइसलैंड की विशेषज्ञता की सराहना करते हुए भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते से आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेट्टेरी ऑर्पो से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ हुई बैठक में व्यापार, निवेश, हरित परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक मंच पर भारत को मजबूत पहचान दिलाने वाला लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता बताया। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्वे के बीच नवाचार, हरित विकास और सतत सहयोग को लेकर बनी सहमति भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनस गार स्टोरे के साथ बैठक को अत्यंत फलदायी बताते हुए कहा कि भारत और नॉर्वे के संबंधों को ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक उन्नत करना इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। इससे स्वच्छ ऊर्जा, ब्लू इकॉनमी, हरित नौवहन और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।
भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 19 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। लगभग 700 नॉर्डिक कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जबकि करीब 150 भारतीय कंपनियां नॉर्डिक देशों में कारोबार कर रही हैं। यही कारण है कि भारत इन देशों को केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी देख रहा है।
माना जा रहा है कि शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, यूक्रेन संकट के प्रभाव, आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन के बाद संयुक्त संवाददाता वार्ता में भविष्य की साझेदारी को लेकर साझा बयान जारी किया जा सकता है।




