नई दिल्ली, 1 जून (वेब वार्ता)। कक्षा दसवीं की परीक्षा समाप्त होते ही देशभर के लाखों विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का नया चरण शुरू हो जाता है। इंजीनियरिंग और चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश का सपना देखने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थी हर वर्ष राजस्थान के कोटा शहर का रुख करते हैं। हालांकि कोटा पहुंचने के बाद विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कोचिंग की गहन पढ़ाई और स्कूली शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कोटा की तैयारी व्यवस्था केवल कोचिंग कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां विद्यार्थियों के समय प्रबंधन और अध्ययन प्रणाली को ध्यान में रखकर पूरा शैक्षणिक ढांचा विकसित हुआ है। इसी कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी दोनों को साथ लेकर सफल होते हैं।
कोटा में अध्ययन कर रहे अधिकांश विद्यार्थी डमी या गैर-उपस्थिति वाले विद्यालयों का विकल्प चुनते हैं। इस व्यवस्था में विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय नहीं जाना पड़ता और वे केवल प्रायोगिक परीक्षाओं तथा बोर्ड परीक्षाओं के समय विद्यालय से जुड़ते हैं। इससे प्रतिदिन कई घंटे बच जाते हैं, जिन्हें विद्यार्थी कोचिंग कक्षाओं, पुनरावृत्ति और स्वाध्याय में लगा पाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डमी विद्यालय का चयन बोर्ड परीक्षा के परिणामों को प्रभावित नहीं करता। प्रतियोगी परीक्षाओं का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की पुस्तकों पर आधारित होता है। ऐसे में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान जैसे विषयों की गहराई से तैयारी करने पर बोर्ड परीक्षा की आधारभूत तैयारी भी मजबूत होती जाती है। विद्यार्थियों को केवल बोर्ड परीक्षा से पहले वर्णनात्मक उत्तर लेखन का अभ्यास बढ़ाने की आवश्यकता होती है।
जो विद्यार्थी नियमित विद्यालय के साथ पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, उनके लिए समन्वित अध्ययन कार्यक्रम उपयोगी माना जाता है। कोटा में कई विद्यालय और कोचिंग संस्थान ऐसे मॉडल पर कार्य करते हैं, जहां विद्यालय और कोचिंग का समय एक-दूसरे के अनुकूल रखा जाता है। इससे विद्यार्थियों को अनावश्यक आवागमन और समय की बर्बादी से राहत मिलती है।
सफल विद्यार्थियों के अनुभव बताते हैं कि समय प्रबंधन ही कोटा में सफलता का सबसे बड़ा आधार है। सामान्य रूप से प्रतिदिन चार से पांच घंटे कोचिंग, पांच से छह घंटे स्वाध्याय और छह से सात घंटे की पर्याप्त नींद को आवश्यक माना जाता है। इसके अतिरिक्त भोजन, विश्राम और हल्की शारीरिक गतिविधियों के लिए भी समय निर्धारित रखना जरूरी होता है।
शिक्षाविदों के अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पढ़ाई में पिछड़ना होती है। यदि विद्यार्थी नियमित पुनरावृत्ति और दैनिक कार्यों को समय पर पूरा नहीं करते, तो अध्ययन का दबाव तेजी से बढ़ जाता है। इसलिए प्रतिदिन का कार्य उसी दिन पूरा करने की आदत को सफलता का मूल मंत्र माना जाता है।
मानसिक दबाव और ध्यान भटकाने वाले कारकों से दूरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। सामाजिक माध्यमों का अत्यधिक उपयोग विद्यार्थियों की एकाग्रता को प्रभावित करता है। विशेषज्ञ सीमित इंटरनेट उपयोग और केवल शैक्षणिक आवश्यकता तक तकनीक के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
इसके साथ ही सकारात्मक मित्र मंडली और परिवार से नियमित संवाद को भी मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक माना गया है। विद्यार्थियों का कहना है कि माता-पिता से नियमित बातचीत तनाव और अकेलेपन को कम करने में सहायक होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की बुनियाद होती हैं। यदि विद्यार्थी धैर्य, अनुशासन और संतुलित रणनीति के साथ अध्ययन करें तो कोटा की चुनौतीपूर्ण तैयारी यात्रा को सफलता में बदला जा सकता है।




