नई दिल्ली, 17 जून (वेब वार्ता)। वर्षों से लंबित किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर संबंधित राज्यों के बीच सहमति बन गई है। इस निर्णय को यमुना नदी के पुनर्जीवन और क्षेत्रीय जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गृह मंत्रालय के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर सहमति व्यक्त की है। समझौते की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना को अनुमोदन के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
बैठक में केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में परियोजना के वित्तीय ढांचे पर भी सहमति बनी। निर्णय के अनुसार जल घटक से संबंधित कार्यों की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र सरकार सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि छह राज्यों द्वारा साझा की जाएगी।
इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत साझेदारी के बदले हिमाचल प्रदेश को आवंटित जल का एक हिस्सा दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इससे भविष्य में पेयजल उपलब्धता और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार राष्ट्रहित और जनहित से जुड़े जटिल एवं लंबे समय से लंबित विषयों का समाधान संवाद और सहमति के माध्यम से निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। किशाऊ परियोजना पर बनी सहमति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के क्रियान्वयन से यमुना नदी में स्वच्छ जल का प्रवाह बढ़ेगा, जल संरक्षण को बल मिलेगा और बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
यमुना नदी की स्वच्छता और जल उपलब्धता को लेकर लंबे समय से चल रहे प्रयासों के बीच किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना पर बनी यह सहमति भविष्य में राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।




