मुंबई, 09 मई (वेब वार्ता)। महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच संजय राउत ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि स्थानीय भाषाओं का सम्मान केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे देश में ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
संजय राउत ने कहा कि जिस प्रकार पश्चिम बंगाल में बांग्ला, गुजरात में गुजराती, कर्नाटक में कन्नड़ और पंजाब में पंजाबी भाषा का महत्व है, उसी तरह महाराष्ट्र में मराठी भाषा को अनिवार्य बनाए जाने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग वोट बैंक की राजनीति के कारण मराठी भाषा का विरोध कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय व्यवस्था और चालकों की सुविधा के लिए है। उनके अनुसार, यदि ऑटो और टैक्सी चालक मराठी भाषा समझेंगे और बोल पाएंगे तो स्थानीय लोगों से संवाद करने और काम करने में आसानी होगी।
दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब महाराष्ट्र सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की कि 1 मई, महाराष्ट्र दिवस से सभी लाइसेंसधारी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया जाएगा।
प्रताप सरनाईक ने बताया था कि मोटर परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से विशेष लाइसेंस निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान यह जांच की जाएगी कि संबंधित चालक मराठी पढ़ और लिख सकते हैं या नहीं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि जो चालक मराठी भाषा नहीं जानते होंगे, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना और यात्रियों के साथ बेहतर संवाद सुनिश्चित करना है।
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय पहचान का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस विषय पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।




