भोपाल, 09 मई (वेब वार्ता)। भोपाल के ऐशबाग इलाके में सार्वजनिक टॉयलेट निर्माण को लेकर नगर निगम और रेलवे के बीच विवाद गहरा गया है। जमीन के मालिकाना हक को लेकर दोनों विभाग आमने-सामने आ गए हैं। नगर निगम ने दावा किया है कि जिस जमीन पर निर्माण कार्य चल रहा है, वह म्युनिसिपल बोर्ड की संपत्ति है, जबकि रेलवे इसे अपनी भूमि बता रहा है।
नगर निगम की ओर से पश्चिम मध्य रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता को पत्र जारी कर बिना अनुमति बनाई गई बाउंड्री वॉल हटाने को कहा गया है। निगम ने चेतावनी दी है कि यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो नगर निगम अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम द्वारा कराई गई जांच में बताया गया कि निर्माण स्थल की जमीन खसरा नंबर 1081(5) और 1082(5) में दर्ज है। निगम के अनुसार करीब 0.1290 हेक्टेयर यानी लगभग 12,163 वर्गफीट जमीन म्युनिसिपल बोर्ड के नाम दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे क्षेत्र में से केवल लगभग 200 वर्गफीट हिस्से में सार्वजनिक टॉयलेट का निर्माण किया जा रहा है।
निगम अधिकारियों ने राजस्व रिकॉर्ड, गूगल मैप और मौके की तस्वीरों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे ने बिना अनुमति बाउंड्री वॉल बनाकर टॉयलेट निर्माण स्थल को घेर लिया है।
दरअसल, विवाद उस समय बढ़ा जब रेलवे ने नगर निगम को नोटिस जारी कर दावा किया कि सार्वजनिक टॉयलेट का निर्माण रेलवे की जमीन पर किया जा रहा है और इसे तुरंत हटाया जाए। इसके बाद नगर निगम ने राजस्व अमले और इंजीनियरों की संयुक्त टीम बनाकर मौके पर जांच कराई। जांच के दौरान रेलवे के इंजीनियर भी मौजूद रहे।
स्थानीय लोगों से पूछताछ में कुछ रहवासियों ने बताया कि इस स्थान पर पहले अवैध पार्किंग संचालित होती थी। इसके बाद नगर निगम ने अपने दावे को मजबूत बताते हुए रेलवे को आधिकारिक पत्र भेज दिया।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री आरआर जारोलिया द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि रेलवे का निर्माण कार्य बिना अनुमति किया गया है। निगम ने साफ कहा है कि यदि बाउंड्री वॉल नहीं हटाई गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर भोपाल रेल मंडल के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे के पास अधिकृत भूमि मानचित्र मौजूद है और उसी के आधार पर जमीन का सत्यापन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि पूरी जांच और सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल ऐशबाग का यह टॉयलेट विवाद नगर निगम और रेलवे के बीच प्रशासनिक और कानूनी टकराव का रूप ले चुका है। दोनों विभाग अपने-अपने रिकॉर्ड के आधार पर दावे कर रहे हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।




