मुंबई, 16 जून (वेब वार्ता)। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के दोनों गुटों के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। नागपुर से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती सामने आई है। पार्टी के नागपुर शहर प्रमुख नितिन तिवारी ने अपने कई समर्थकों और पदाधिकारियों के साथ ठाकरे गुट का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार, मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में सांसद श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में नितिन तिवारी और उनके सहयोगियों ने औपचारिक रूप से शिंदे गुट की सदस्यता ग्रहण की। उनके साथ शिवसेना शहर सचिव, युवा सेना शहर प्रमुख और कामगार सेना के शहर संगठक सहित कई प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल हुए।
इस घटनाक्रम को नागपुर में उद्धव ठाकरे के संगठनात्मक ढांचे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव स्थानीय स्तर पर शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है और आने वाले समय में इसके व्यापक राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
संजय राउत के दावों के बीच बढ़ी चुनौती
नागपुर में हुए इस घटनाक्रम की विशेष चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने दावा किया था कि पार्टी पूरी तरह मजबूत है और उसके नेता संगठन के साथ मजबूती से खड़े हैं।
उन्होंने एकनाथ शिंदे गुट की ओर से कथित तौर पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत सांसदों को तोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी में किसी प्रकार की असंतुष्टि नहीं है। हालांकि, नागपुर में शहर स्तर के कई पदाधिकारियों के पार्टी छोड़ने से विपक्षी दलों को ठाकरे गुट पर सवाल उठाने का अवसर मिल गया है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ बनाम ‘ऑपरेशन वुल्फ’ की सियासी जंग
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ और ‘ऑपरेशन वुल्फ’ की काफी चर्चा है। अविभाजित शिवसेना का चुनाव चिह्न और प्रतीक बाघ रहा है, जिसे पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे ने लोकप्रिय पहचान दी थी। इसी संदर्भ में शिंदे गुट की रणनीति को ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया गया।
इसके जवाब में संजय राउत ने कहा था कि शिवसेना (यूबीटी) भी अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन वुल्फ’ शुरू करेगी। उनका कहना था कि ठाकरे गुट अपने संगठन को और मजबूत करेगा तथा किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार है।
सांसदों की बैठक भी रही चर्चा में
इससे पहले रविवार को उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। नौ सांसदों वाली पार्टी की इस बैठक में केवल चार सांसद प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित हुए थे। इनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटील शामिल थे।
अन्य सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर उठे सवालों पर संजय राउत ने स्पष्ट किया था कि ओम प्रकाश राजे निंबालकर, भाउसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ने ऑनलाइन माध्यम से बैठक में भाग लिया था, जबकि संजय जाधव ने दूरभाष पर उद्धव ठाकरे से बातचीत की थी।
राउत ने दावा किया था कि पार्टी के सभी सांसद संगठन के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी प्रकार की नाराजगी नहीं है। हालांकि, नागपुर में पदाधिकारियों के इस पलायन ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा
नागपुर में नितिन तिवारी और अन्य पदाधिकारियों का शिंदे गुट में जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच संगठनात्मक वर्चस्व की लड़ाई अभी जारी है। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित रहता है या फिर इसका असर राज्य की व्यापक राजनीति पर भी पड़ता है।




