नोएडा में वेतन वृद्धि विवाद ने लिया उग्र रूप, बाहरी राज्यों से व्हाट्सएप-टेलीग्राम के जरिए भड़काने के संकेत

नोएडा, 16 अप्रैल, 2026 (वेब वार्ता)। नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर भड़की हिंसा के पीछे बाहरी राज्यों से डिजिटल माध्यमों के जरिए उकसावे के संकेत सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि तेलंगाना और कर्नाटक से संचालित व्हाट्सएप व टेलीग्राम समूहों के माध्यम से श्रमिकों को निर्देश दिए जा रहे थे।

मामले की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने हिंसा के दौरान बनाए गए 500 से अधिक वीडियो खंगालने शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर सक्रिय समूह भी एजेंसी के रडार पर हैं।

डिजिटल ट्रेल से मिले अहम सुराग

एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि कई व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों को दूर बैठे लोग संचालित कर रहे थे। इन समूहों में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत बड़ी संख्या में श्रमिकों को जोड़ा गया था।

जांच एजेंसियां तकनीकी पहलुओं पर भी गहन पड़ताल कर रही हैं। वायरल वीडियो में कई संदिग्ध लोगों की पहचान की जा रही है, जिनमें कुछ ऐसे भी शामिल हैं जो स्थानीय कंपनियों से जुड़े नहीं बताए जा रहे हैं।

हिंसक प्रदर्शन के बाद अब तक करीब 600 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

शिव नाडर विश्वविद्यालय में कर्मचारियों का प्रदर्शन

शिव नाडर विश्वविद्यालय में भी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर बुधवार को कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया। सैकड़ों महिला और पुरुष कर्मचारियों ने मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करते हुए वेतन बढ़ाने और ओवरटाइम का दोगुना भुगतान करने की मांग की।

सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस को देखकर कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बाद में एसीपी प्रशाली गंगवार ने कर्मचारियों को समझाकर शांत कराया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा एक अप्रैल से वेतन वृद्धि लागू करने का आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है।

सेक्टरों और सोसाइटियों तक पहुंचा विरोध

वेतन वृद्धि का मुद्दा अब औद्योगिक क्षेत्रों से निकलकर आवासीय सोसाइटियों तक पहुंच गया है। सेक्टर-63 में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया, वहीं सेक्टर-137 स्थित सोसाइटियों के बाहर घरेलू सहायिकाओं ने हंगामा कर वेतन बढ़ाने और अवकाश देने की मांग की।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद माहौल को शांत कराया जा सका।

वीडियो और सोशल मीडिया पर कड़ी नजर

एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि हिंसा से जुड़े सभी वीडियो की गहन जांच की जा रही है। विशेष रूप से उन फुटेज पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें पुलिस को निशाना बनाया गया या उपद्रव को बढ़ावा दिया गया।

प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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