नई दिल्ली, 16 अप्रैल, 2026 (वेब वार्ता)। राजधानी और उत्तराखंड के बीच सफर को तेज करने वाला दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे जमीनी स्तर पर शुरू हो चुका है, लेकिन यह मार्ग अभी तक गूगल मैप पर दिखाई नहीं दे रहा है। इससे यात्रियों और वाहन चालकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
नेविगेशन में आ रही दिक्कत
एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग यात्रा के दौरान गूगल मैप का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इस मार्ग के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध न होने के कारण उन्हें पुराने रास्तों पर ही भेजा जा रहा है। कई यात्रियों ने इस समस्या को लेकर सामाजिक माध्यमों पर सवाल उठाए हैं कि जब सड़क चालू हो चुकी है, तो यह मैप पर क्यों नहीं दिख रही।
क्या है देरी की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नए राजमार्ग को डिजिटल मैप पर जोड़ने की प्रक्रिया चरणबद्ध होती है। इसमें सैटेलाइट चित्रों का विश्लेषण, जमीनी सर्वेक्षण, प्रवेश और निकास बिंदुओं की पुष्टि तथा तकनीकी परीक्षण शामिल होते हैं। जब तक यह सभी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक नया मार्ग मैप पर सक्रिय नहीं किया जाता।
चरणबद्ध तरीके से खुल रहा मार्ग
यह एक्सप्रेसवे फिलहाल चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा है, जिसके कारण इसके सभी इंटरचेंज और कनेक्टिविटी बिंदुओं को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। यही कारण है कि मैपिंग प्लेटफॉर्म पूरी तरह सत्यापित जानकारी मिलने के बाद ही इसे अपडेट करते हैं।
कब तक दिखेगा मैप पर रूट
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि नए मार्ग को डिजिटल मैप पर आने में कुछ सप्ताह से लेकर कुछ महीने तक का समय लग सकता है। तब तक यात्रियों को साइन बोर्ड और स्थानीय दिशा-निर्देशों के आधार पर यात्रा करनी होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह एक्सप्रेसवे डिजिटल मैप पर भी दिखाई देने लगेगा, जिससे यात्रा और अधिक सुगम हो जाएगी।



