अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा ऊर्जा संकट, भारत में एलपीजी आपूर्ति पर असर

नई दिल्ली, 16 अप्रैल, 2026 (वेब वार्ता)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है। अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी और इसके जवाब में ईरान की धमकियों से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे भारत सहित कई देशों पर असर पड़ा है।

भारत पर पड़ा सीधा प्रभाव

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है। देश अपनी कच्चे तेल की बड़ी मात्रा, गैस का लगभग 40 प्रतिशत और एलपीजी का 85 से 90 प्रतिशत इसी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर घरेलू आपूर्ति और कीमतों पर देखा जा रहा है।

सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एलपीजी की आपूर्ति में प्राथमिकता तय की है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए होटलों और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए आपूर्ति में कटौती की गई है।

देश के प्रमुख शहरों में एलपीजी दरें

देश के विभिन्न शहरों में 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं—

  • दिल्ली: 913.0 रुपये | 2078.5 रुपये
  • मुंबई: 912.5 रुपये | 2031.0 रुपये
  • कोलकाता: 939.0 रुपये | 2208.5 रुपये
  • चेन्नई: 928.5 रुपये | 2246.5 रुपये
  • बेंगलुरु: 915.5 रुपये | 2161.0 रुपये
  • अगरतला: 1073.5 रुपये | 2421.5 रुपये
  • भोपाल: 918.5 रुपये | 2084.0 रुपये
  • चंडीगढ़: 922.5 रुपये | 2099.5 रुपये
  • देहरादून: 932.0 रुपये | 2131.5 रुपये

‘जग विक्रम’ से मिली राहत

इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। भारत का एलपीजी पोत जग विक्रम गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंच चुका है। इस जहाज में लगभग 20,400 टन एलपीजी लदा हुआ है, जिससे देश में आपूर्ति को मजबूती मिलेगी।

यह जहाज संघर्ष-विराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने वाला पहला भारतीय पोत बना है। अधिकारियों के अनुसार, अभी भी कई जहाज इस मार्ग में फंसे हुए हैं, जिससे आपूर्ति शृंखला पर दबाव बना हुआ है।

वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। इसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दीर्घकालिक रूप से पड़ने की आशंका है।

सरकार और ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही हैं, ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े।

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