नई दिल्ली, 19 मई (वेब वार्ता)। ईंधन बचत और प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपीलों के बीच राजधानी दिल्ली का आम यात्री सोमवार को कठिन हालात से जूझता नजर आया। मेट्रो पहले से ही क्षमता से अधिक दबाव झेल रही है, जबकि सड़कों पर बसों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम दिखाई दे रही है। ऐसे में निजी वाहनों से दूरी बनाने की सरकारी अपील जमीनी स्तर पर चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।
साप्ताहिक अवकाश के बाद सोमवार सुबह सार्वजनिक परिवहन पर यात्रियों का दबाव अचानक बढ़ गया। दिल्ली सरकार के मंत्री और अधिकारी भले सार्वजनिक परिवहन से कार्यालय पहुंचे हों, लेकिन आम लोग मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप पर लंबी कतारों में परेशान दिखाई दिए। कई यात्रियों ने कहा कि यदि वे पूरी तरह बस और मेट्रो पर निर्भर रहें तो समय पर कार्यालय पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
राजधानी में ब्लू लाइन, येलो लाइन और रेड लाइन पर सबसे अधिक भीड़ देखी गई। राजीव चौक, कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सेंट्रल सचिवालय जैसे प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर सुबह के समय यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यात्रियों का कहना था कि ट्रेनें पहले से ही खचाखच भरी हुई पहुंच रही थीं, जिससे कई बार प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
बस सेवा की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं दिखी। कई मार्गों पर बसों के बीच अंतराल बढ़ गया और यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। बसों की कमी का सीधा असर मेट्रो पर अतिरिक्त दबाव के रूप में सामने आया।
दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम को जोड़ने वाले मार्गों समेत आउटर रिंग रोड पर भी सुबह और शाम लंबा जाम लगा रहा। तेज गर्मी के बीच वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। कई लोगों ने ईंधन बचाने के लिए वाहन बंद रखने की कोशिश की, लेकिन गर्मी और उमस के कारण उन्हें दोबारा वाहन चालू करना पड़ा।
परिवहन व्यवस्था के आंकड़े भी चुनौती की तस्वीर पेश करते हैं। दिल्ली और एनसीआर में मेट्रो का नेटवर्क लगभग 416 किलोमीटर लंबा है और 303 स्टेशन संचालित हो रहे हैं। प्रतिदिन 275 से अधिक मेट्रो रेलगाड़ियों का संचालन किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर राजधानी में लगभग 89 लाख निजी वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें बड़ी संख्या दोपहिया वाहनों की है।
डीटीसी के पास वर्तमान में करीब 6300 बसें हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली जैसे महानगर के लिए 11 हजार से अधिक बसों की जरूरत है। बसों की कमी के कारण निजी वाहनों का उपयोग बढ़ रहा है और इससे सड़कों पर जाम तथा प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं।
लक्ष्मी नगर निवासी दैनिक यात्री लवकुश ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की अपील करती है, लेकिन बसें समय पर नहीं मिलतीं। वहीं आईटीओ जाने वाले शंकर जैन का कहना है कि लोग शौक से नहीं बल्कि मजबूरी में निजी वाहन निकालते हैं। प्रीत विहार के यात्री आदिल ने बताया कि कई क्षेत्रों में मेट्रो संपर्क नहीं होने से बसों पर निर्भर रहना पड़ता है और भीड़ के कारण चढ़ना तक मुश्किल हो जाता है।
परिवहन विशेषज्ञ डॉ. अनिल छिकारा का कहना है कि केवल जागरूकता अभियान चलाने से लोग निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन की ओर नहीं आएंगे। बेहतर बस सेवा, समयबद्ध संचालन, अतिरिक्त फेरे और अंतिम मील संपर्क मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उनका मानना है कि यदि गर्मियों और कार्यालय-विद्यालय के व्यस्त मौसम में अतिरिक्त बसें और मेट्रो सेवाएं नहीं बढ़ाई गईं, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।




