ईरान दौरे पर आसिम मुनीर, युद्ध के बीच पाकिस्तान की बढ़ी कूटनीतिक भूमिका

तेहरान/इस्लामाबाद, 19 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir का ईरान दौरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा संघर्ष के दौरान वह ईरान पहुंचने वाले पहले विदेशी सैन्य प्रमुख बताए जा रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, आसिम मुनीर के ईरान के साथ संबंध लंबे समय से रहे हैं। जब वह पाकिस्तान में सैन्य खुफिया प्रमुख थे, तभी से उन्होंने ईरानी नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियों के साथ संपर्क स्थापित किया था। विशेष रूप से Islamic Revolutionary Guard Corps के साथ उनके संबंधों को लेकर चर्चा होती रही है।

पाकिस्तान के सेवानिवृत्त जनरल अहमद सईद के अनुसार, मुनीर के रिश्ते केवल आईआरजीसी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ईरान की सेना और खुफिया तंत्र के साथ भी उनके गहरे संबंध रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुनीर के ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य नेताओं के साथ व्यक्तिगत संपर्क रहे हैं।

वहीं अमेरिकी विशेषज्ञों ने इस दौरे को लेकर चिंता व्यक्त की है। Foundation for Defense of Democracies से जुड़े विश्लेषक बिल रोगियो ने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका पर अमेरिका को सतर्क रहना चाहिए और आईआरजीसी से जुड़े संबंधों को गंभीरता से लेना चाहिए।

इस बीच पाकिस्तानी विश्लेषक रज़ा रूमी ने भी मुनीर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में सेना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे नागरिक नेतृत्व कमजोर पड़ता दिख रहा है।

हाल ही में आसिम मुनीर ने तीन दिन का ईरान दौरा पूरा किया, जिसके दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, संसद अध्यक्ष और सैन्य नेतृत्व से मुलाकात की। इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और संभावित समझौतों को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अगला दौर जल्द ही इस्लामाबाद में हो सकता है। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका एक मध्यस्थ के रूप में उभरती नजर आ रही है, जो क्षेत्रीय कूटनीति में उसके बढ़ते प्रभाव की ओर संकेत करती है।

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