मुंबई, 16 जुलाई (वेब वार्ता)। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जारी भूख हड़ताल के बीच अभिनेता और हास्य कलाकार वीर दास की एक सामाजिक माध्यम पोस्ट चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि उन्होंने अपने संदेश में सोनम वांगचुक या किसी विशेष आंदोलन का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया, लेकिन लोकतंत्र, नागरिक जिम्मेदारी और जनहित के मुद्दों पर प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर उनके विचारों ने नई बहस छेड़ दी है।
वीर दास ने अपने संदेश में कहा कि स्वयं को अराजनीतिक बताना या यह कहना कि किसी के पास आवाज उठाने का अधिकार या विशेषाधिकार नहीं है, सबसे विचित्र तर्कों में से एक है। उन्होंने लिखा कि जिन लोगों ने वर्षों से विभिन्न मुद्दों पर आवाज उठाई है, उनके पास अक्सर सामान्य लोगों की तुलना में कहीं कम विशेषाधिकार और खोने के लिए कहीं अधिक होता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक है, विशेषकर सत्ता में बैठे लोगों के प्रति। उनके अनुसार नागरिकों को उन प्रतिनिधियों से भी कठिन सवाल पूछने चाहिए, जिन्हें उन्होंने स्वयं चुना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों से निरंतर जवाबदेही मांगना भी नागरिकों का दायित्व है।
वीर दास ने अपने संदेश में यह भी कहा कि दैनिक जीवन का लगभग हर पहलू सरकारी नीतियों से प्रभावित होता है। यदि किसी के परिवार में महिलाएं, बच्चे, विद्यार्थी या पालतू पशु हैं, यदि वह सड़कों का उपयोग करता है, स्वच्छ हवा में सांस लेता है और पानी का उपयोग करता है, तो इन सभी विषयों का संबंध सार्वजनिक नीतियों से है। ऐसे में राजनीति से पूरी तरह अलग रहने का दावा करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।
उन्होंने आगे लिखा कि असहज करने वाली चर्चाओं से बचना किसी विचारधारा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत चुनाव हो सकता है। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसे अराजनीतिक होने का नाम देना उचित नहीं है।
वीर दास की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल उन्नीसवें दिन में प्रवेश कर चुकी है और उनके समर्थन में देशभर में चर्चा जारी है। कई प्रसिद्ध हस्तियों ने उनसे स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है, जबकि अनेक लोगों ने सरकार से उनके साथ संवाद शुरू करने की अपील की है।
हालांकि वीर दास ने अपने संदेश में किसी व्यक्ति या आंदोलन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को नागरिक भागीदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक जीवन में प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। सामाजिक माध्यमों पर उनकी पोस्ट को लेकर समर्थन और आलोचना, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।




