गोवा, (वेब वार्ता)। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था और बाद में अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, नाना पाटेकर को सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम कराया जाना है।
एक नजर में नाना पाटेकर
- पूरा नाम: विश्वनाथ पाटेकर
- जन्म: 1 जनवरी 1951
- निधन: 8 अक्टूबर 2026
- उम्र: 75 वर्ष
- निधन का स्थान: गोवा
- प्रमुख क्षेत्र: हिंदी और मराठी सिनेमा
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: 3
- पद्मश्री: 2013
गोवा स्थित घर पर बिगड़ी तबीयत
रिपोर्टों के मुताबिक नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकीय टीम ने लगभग 45 मिनट तक लगातार CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उपचार का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार सुबह 5:20 बजे उनकी मृत्यु की पुष्टि हुई।
निधन के बाद मामले में मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है। पोस्टमॉर्टम के बाद ही मृत्यु से जुड़े चिकित्सकीय विवरणों की औपचारिक पुष्टि होगी। इसलिए शुरुआती रिपोर्टों में इस्तेमाल किए जा रहे अलग-अलग चिकित्सा शब्दों के बजाय फिलहाल अस्पताल द्वारा बताए गए severe cardiac arrest को आधार माना जाना अधिक उचित है।
‘परिंदा’ से राष्ट्रीय पुरस्कारों तक पहुंचा सफर
नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में उन्होंने अन्ना का किरदार निभाया और इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। इसके बाद 1994 की ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। 1996 की ‘अग्निसाक्षी’ के लिए उन्हें एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इस तरह उनके खाते में कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दर्ज हुए।
सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया। उनका फिल्मी करियर केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मराठी सिनेमा में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
‘वेलकम’ के उदय शेट्टी ने बदली कॉमेडी की तस्वीर
नाना पाटेकर की अभिनय क्षमता का एक अलग रंग 2007 की फिल्म ‘वेलकम’ में दिखाई दिया। फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। गंभीर और तीखे किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले नाना ने इस भूमिका में अपने कॉमिक अंदाज से भी दर्शकों को प्रभावित किया। बाद में वह ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के किरदार में दिखाई दिए।
‘प्रहार’ के लिए तीन साल की सैन्य ट्रेनिंग
नाना पाटेकर की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण अध्याय भारतीय सेना से भी जुड़ा रहा। ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ फिल्म की तैयारी के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ करीब तीन साल तक सैन्य प्रशिक्षण लिया था। बाद में यही अनुभव उनके वास्तविक जीवन में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ। 2026 में सामने आए उनके पुराने अनुभवों से जुड़ी रिपोर्टों में उन्होंने बताया कि फिल्म की तैयारी के दौरान मिली सैन्य ट्रेनिंग ने उन्हें सेना की कार्यशैली को करीब से समझने का अवसर दिया था।
कारगिल युद्ध के दौरान सेना के साथ रहे नाना पाटेकर
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर ने सेना के साथ रहने की इच्छा जताई थी। उनके मुताबिक उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से संपर्क किया और विशेष अनुमति मिलने के बाद सैनिकों के साथ संघर्ष क्षेत्र में समय बिताया। हाल की रिपोर्टों में उनके हवाले से बताया गया है कि उन्होंने क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के साथ भी समय बिताया था।
समकालीन 1999 की इंडिया टुडे रिपोर्ट में भी दर्ज है कि नाना पाटेकर कारगिल क्षेत्र में सैनिकों के साथ दो सप्ताह से अधिक समय तक रहे और अलग-अलग पोस्टों पर सैनिकों के बीच समय बिताया। बाद के वर्षों में नाना ने इस अनुभव को कई इंटरव्यू में याद किया।
क्या था नाना पाटेकर का सेना से रिश्ता?
नाना पाटेकर का सेना से संबंध केवल फिल्मों में सैनिक की भूमिका निभाने तक सीमित नहीं था। ‘प्रहार’ की तैयारी के दौरान उन्होंने वास्तविक सैन्य प्रशिक्षण लिया और बाद में कारगिल युद्ध के दौरान सैनिकों के बीच भी रहे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह टेरिटोरियल आर्मी से भी जुड़े और बाद में मानद सैन्य पद पर रहे।
सिनेमा और सेना, दोनों से जुड़ी अलग पहचान
नाना पाटेकर उन कलाकारों में रहे जिनकी सार्वजनिक पहचान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। एक तरफ ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘प्रहार’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके गंभीर और प्रभावशाली अभिनय ने पहचान बनाई, वहीं ‘वेलकम’ जैसी फिल्म ने उनके हास्य अभिनय की क्षमता भी सामने रखी।
उनकी संवाद अदायगी, आवाज और किरदारों में दिखाई देने वाली तीव्रता ने उन्हें हिंदी और मराठी सिनेमा के विशिष्ट अभिनेताओं में स्थान दिलाया। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री उनके लंबे फिल्मी सफर में मिले प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों में शामिल हैं।
नाना पाटेकर की विरासत
| पड़ाव | उपलब्धि |
|---|---|
| 1978 | फिल्म ‘गमन’ से फिल्मी करियर की शुरुआत |
| 1989 | ‘परिंदा’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार |
| 1994 | ‘क्रांतिवीर’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार |
| 1996 | ‘अग्निसाक्षी’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार |
| 2007 | ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी की लोकप्रिय भूमिका |
| 2013 | पद्मश्री से सम्मानित |
| 2026 | 75 वर्ष की उम्र में निधन |
अब आगे क्या होगा?
नाना पाटेकर के निधन के बाद पोस्टमॉर्टम और मेडिको-लीगल प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे मृत्यु से जुड़े चिकित्सकीय विवरणों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी। वहीं भारतीय सिनेमा में उनके दशकों लंबे योगदान को देखते हुए फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी है।
एक कलाकार, जिसकी आवाज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी
नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने पर्दे पर कभी कठोर पुलिस अधिकारी, कभी सैनिक, कभी खलनायक और कभी हास्य किरदार को ऐसी तीव्रता से निभाया कि उनके किरदार दर्शकों की स्मृति में अलग पहचान बना गए। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ एक ऐसा अभिनय अध्याय समाप्त हुआ, जिसने हिंदी और मराठी दोनों सिनेमा पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
फिल्मों से लेकर सेना से जुड़े अनुभवों तक, नाना पाटेकर का सफर कई अलग-अलग रंगों से भरा रहा। उनके निभाए किरदार और उनकी विशिष्ट संवाद अदायगी आने वाले वर्षों में भी भारतीय सिनेमा के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी।
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