वॉशिंगटन, 16 जुलाई (वेब वार्ता)। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाले एक डॉलर के नए स्मारक सिक्के का निर्माण शुरू हो गया है। अमेरिकी मिंट ने इस विशेष सिक्के का उत्पादन प्रारंभ कर दिया है, जिसे इसी वर्ष पतझड़ के मौसम में जारी किए जाने की तैयारी है। यह सिक्का अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में तैयार किया गया है और इसके अंतिम स्वरूप को अमेरिकी ललित कला आयोग से स्वीकृति मिल चुकी है।
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार यह एक स्मारक सिक्का है, जिस पर सामने की ओर सूट और टाई पहने डोनाल्ड ट्रंप का चित्र उकेरा गया है। चित्र के ऊपर ‘लिबर्टी’ तथा नीचे ‘1776-2026’ अंकित है। सिक्के के पिछले भाग पर अमेरिका के राष्ट्रीय पक्षी बाल्ड ईगल की पारंपरिक आकृति बनाई गई है।
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सिक्का शुद्ध सोने का नहीं है, बल्कि इस पर केवल सोने की परत चढ़ाई गई है। इसका उद्देश्य अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ को स्मरणीय बनाना और विशेष स्मारक श्रृंखला के रूप में इसे जारी करना है।
हालांकि इस सिक्के को लेकर अमेरिका में कानूनी और राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। संघीय कानून के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मुद्रा पर अंकित नहीं की जाती। आलोचकों का कहना है कि यह परंपरा और स्थापित नियमों के विपरीत कदम है।
वहीं, वित्त विभाग का कहना है कि विशेष परिस्थितियों में वित्त मंत्री को स्मारक सिक्कों के निर्माण और जारी करने की अनुमति देने का अधिकार प्राप्त है। इसी अधिकार के तहत इस सिक्के को स्वीकृति दी गई है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सामाजिक माध्यम पर जारी संदेश में कहा कि यह स्मारक सिक्का देशभक्ति और अमेरिकी मूल्यों का स्थायी प्रतीक है तथा देश की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करता है।
इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। आलोचकों का आरोप है कि जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर वाला सिक्का जारी करना परंपरा से हटकर कदम है, जबकि समर्थकों का कहना है कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह एक ऐतिहासिक स्मारक के रूप में देखा जाना चाहिए।
इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन से जुड़ा एक निर्णय चर्चा में रहा था, जब मार्च में वित्त विभाग ने घोषणा की थी कि अमेरिकी कागजी मुद्रा पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर भी शामिल किए जाएंगे। परंपरागत रूप से अमेरिकी नोटों पर केवल वित्त मंत्री और कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर होते रहे हैं।




