नई दिल्ली, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अंतरिम राहत वापस ले ली है। साथ ही अदालत ने अभिनेता को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
यह मामला फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए ऋण से जुड़ा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान राजपाल यादव का आचरण संतोषजनक नहीं पाया गया और मामले में उनका रवैया विश्वास के योग्य नहीं रहा। न्यायालय ने यह भी कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद बकाया राशि का पूरा भुगतान नहीं किया गया।
मामले के अनुसार, वर्ष 2010 में फिल्म के निर्माण के लिए राजपाल यादव ने एक निजी कंपनी से लगभग पांच करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म के व्यावसायिक रूप से सफल नहीं होने के कारण निर्धारित समय पर ऋण का भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद भुगतान के लिए जारी किए गए कई चेक अनादरित हो गए, जिसके चलते उनके खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत सात अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।
वर्ष 2018 में विचारण न्यायालय ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को इन मामलों में छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में सत्र न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सजा पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें बकाया राशि चुकाने के लिए कई अवसर प्रदान किए थे।
अदालत के अनुसार, कई बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद बकाया राशि का पूर्ण भुगतान नहीं किया गया। इसी आधार पर न्यायालय ने अंतरिम राहत समाप्त करते हुए अभिनेता को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।




