वैश्विक बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट वायदा लगभग 6 प्रतिशत की तेजी के साथ 88.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड के जून अनुबंध में भी करीब 5.63 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद इसकी कीमत 95.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत के आयात पर भी देखने को मिला है। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार मार्च माह में भारत का कच्चे तेल का आयात पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत घट गया है। यह गिरावट क्षेत्र में बढ़ते संकट और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों की ओर संकेत करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ सकता है। यदि ईंधन महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ने के कारण रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव उस समय और बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी जहाज के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने उस जहाज को कब्जे में ले लिया, जो कथित रूप से नाकेबंदी तोड़ने का प्रयास कर रहा था।
इस घटनाक्रम के बाद ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो उसके महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे हालात में वैश्विक बाजारों की नजर अब आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिति और कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई है।



