देहरादून, 20 अप्रैल (वेब वार्ता)। राज्य में मुरझाई नर्सरियों को पुनर्जीवित करने के लिए उद्यान विभाग ने व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत नर्सरियों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। विभाग ने इसके लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है, जो प्रत्येक नर्सरी के पुनर्जीवन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
प्रदेश में उद्यान विभाग की कुल 92 नर्सरियां हैं, जिनमें से कई का अभी पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए विभाग ने पुनर्जीवन योजना लागू करने का निर्णय लिया है। नोडल अधिकारी स्थानीय फसल चक्र और किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे।
योजना के तहत यूरोपीय सब्जियों के बीज और पौध उत्पादन इकाइयों की स्थापना भी की जाएगी। इससे किसानों को नई फसलों की खेती का अवसर मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप पौध तैयार कर ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जाएगी।
नोडल अधिकारियों को अल्पकालीन, मध्यम अवधि और दीर्घकालीन योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें बीज उत्पादन, क्लोनल रूट स्टॉक व्यवस्था और फलदार पौधों के उत्पादन के लिए विशेष कार्यक्रम शामिल होंगे।
इसके अलावा नर्सरियों में मौन पालन इकाइयों और वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित करने की भी योजना बनाई जा रही है। इससे न केवल जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उद्यान विभाग की यह पहल कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।



