नई दिल्ली, 20 जून (वेब वार्ता)। आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्वर्ण भंडार मिलने की संभावना ने खनन और आर्थिक क्षेत्र में उत्साह बढ़ा दिया है। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार कुर्नूल जिले के जोन्नागिरी क्षेत्र सहित कई स्थानों पर स्वर्ण भंडार के महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार केवल जोन्नागिरी क्षेत्र में ही लगभग 50 टन स्वर्ण भंडार मौजूद हो सकता है।
खनन विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्वर्ण खनन की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुर्नूल जिले के जोन्नागिरी गांव के अलावा रामागिरी, जाव्वाकुला, चिगुरुकुंटा और बिस्नातम क्षेत्रों को भी संभावित स्वर्ण खनन क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है।
उन्होंने बताया कि यदि वर्तमान अनुमान सही साबित होते हैं तो आने वाले वर्षों में आंध्र प्रदेश देश के प्रमुख स्वर्ण उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की स्वर्ण आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
प्रधान सचिव ने जानकारी दी कि जोन्नागिरी क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर स्वर्ण उत्पादन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। लगभग एक दशक पहले यहां करीब 1,500 एकड़ भूमि स्वर्ण खनन के लिए आवंटित की गई थी। हालांकि अब तक केवल 500 एकड़ क्षेत्र में ही विस्तृत सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्य किया गया है।
अब तक की खोज के आधार पर इस क्षेत्र में लगभग 13 टन स्वर्ण भंडार का अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि शेष 1,000 एकड़ भूमि में अन्वेषण कार्य पूरा होने के बाद कुल स्वर्ण भंडार 50 टन तक पहुंच सकता है।
मुकेश कुमार मीणा ने बताया कि स्वर्ण खनन अत्यधिक पूंजी और आधुनिक तकनीक पर आधारित उद्योग है। इसी कारण सरकार ने निविदा प्रक्रिया के माध्यम से निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी खनन कार्य में भागीदारी का अवसर देने का निर्णय लिया है। यह पहली बार होगा जब इस प्रकार की परियोजनाओं में निजी कंपनियों की भूमिका अधिक व्यापक रूप से देखने को मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि खनन उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वर्ण निष्कर्षण की घटती दर है। पहले एक टन खनिज सामग्री से लगभग तीन ग्राम स्वर्ण प्राप्त हो जाता था, जबकि वर्तमान में यह मात्रा घटकर लगभग एक ग्राम प्रति टन रह गई है। यदि यह दर 0.8 ग्राम प्रति टन से नीचे चली जाती है तो परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती है।
अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू इस महीने के अंत तक जोन्नागिरी स्वर्ण खनन परियोजना का औपचारिक शुभारंभ कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुमानित स्वर्ण भंडार की पुष्टि हो जाती है तो यह परियोजना आंध्र प्रदेश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।




