नई दिल्ली | बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता
ADB Bamboo Industry को नई गति देने के उद्देश्य से एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने पूर्वोत्तर भारत के छह राज्यों के लिए करीब 3,986 करोड़ रुपये की लघु-व्यय वित्तपोषण सुविधा (Results-Based Lending Facility) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा में बांस की खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को मजबूत किया जाएगा। पहल का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाना, रोजगार सृजित करना, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और भारत की बांस आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
- एडीबी ने पूर्वोत्तर के बांस उद्योग के लिए 3,986 करोड़ रुपये मंजूर किए।
- असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा को मिलेगा लाभ।
- बांस की खेती, प्रसंस्करण और विपणन को मिलेगा बढ़ावा।
- हर राज्य में कम से कम एक महिला-नेतृत्व वाली विनिर्माण इकाई स्थापित होगी।
- ग्रामीण रोजगार, निजी निवेश और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।
- राष्ट्रीय बांस मिशन के अनुरूप मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा।
ADB Bamboo Industry योजना से क्या होगा फायदा?
एडीबी की इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में बांस आधारित उद्योगों को आधुनिक बनाना और किसानों, उत्पादकों तथा स्थानीय उद्यमियों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। योजना के तहत सामुदायिक स्तर की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस पहल से बांस आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
महिलाओं और ग्रामीण उद्यमिता पर विशेष फोकस
योजना के तहत महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। प्रत्येक लाभार्थी राज्य में कम से कम एक महिला-नेतृत्व वाली विनिर्माण इकाई स्थापित की जाएगी, जिससे महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके अलावा निजी निवेशकों, स्टार्टअप्स और स्थानीय उद्यमियों को भी वित्तीय सहायता तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वित्तीय सहायता | 3,986 करोड़ रुपये |
| वित्तपोषण संस्था | एशियाई विकास बैंक (ADB) |
| लाभार्थी राज्य | असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा |
| मुख्य उद्देश्य | बांस की खेती, प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार को बढ़ावा |
| विशेष पहल | महिला-नेतृत्व वाली विनिर्माण इकाइयों की स्थापना |
राष्ट्रीय बांस मिशन को मिलेगा बल
यह परियोजना राष्ट्रीय बांस मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप लागू की जाएगी। इसके तहत बांस की खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, अनुसंधान, प्रशिक्षण, संसाधन प्रबंधन, डिजिटल मूल्य श्रृंखला और तकनीकी संस्थानों की क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके साथ ही उत्पादकों की आय बढ़ाने और बांस आधारित उद्योगों में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विभिन्न वित्तीय एवं तकनीकी उपाय भी किए जाएंगे।
पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
एडीबी की यह पहल केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक मजबूत और टिकाऊ बांस मूल्य श्रृंखला विकसित करना है, जिससे किसानों, कारीगरों और उद्यमियों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से पूर्वोत्तर भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और बांस उद्योग राष्ट्रीय आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।




