लखनऊ, 24 मई (वेब वार्ता)। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों तथा पेंशन ढांचे को लेकर गठित आठवां वेतन आयोग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में आयोग उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 22 और 23 मई को दो दिवसीय परामर्श बैठकों का आयोजन कर रहा है, जहां विभिन्न कर्मचारी संगठनों, संघों, सेवारत कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
आयोग इससे पहले दिल्ली, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी बैठकें आयोजित कर चुका है। लखनऊ बैठक की अधिसूचना 21 मई को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई थी। यह प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर को गठित आयोग की कार्ययोजना का हिस्सा मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह कवायद देश के लगभग 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भविष्य के वेतन और पेंशन ढांचे को तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आयोग विभिन्न पक्षों की राय लेकर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की तैयारी में जुटा है।
सूत्रों के अनुसार लखनऊ में आयोजित मैराथन बैठकों के दौरान कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि न्यूनतम मूल वेतन और नए फिटमेंट गुणांक को लेकर अपनी मांगें आयोग के समक्ष रख सकते हैं। सातवें वेतन आयोग में लागू 2.57 फिटमेंट गुणांक को बढ़ाकर 3.68 से 3.83 तक किए जाने की मांग प्रमुख रूप से उठने की संभावना जताई जा रही है।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान वेतन ढांचे में व्यापक संशोधन आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि फिटमेंट गुणांक 3.83 तक स्वीकार किया जाता है तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम मूल वेतन राशि 18 हजार रुपये से बढ़कर करीब 69 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है।
हालांकि अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। आयोग विभिन्न क्षेत्रों में बैठकों के जरिए सुझाव एकत्र कर रहा है ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की अपेक्षाओं तथा आर्थिक संतुलन के बीच व्यवहारिक समाधान निकाला जा सके।
आठवां वेतन आयोग की बैठकों पर देशभर के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसकी सिफारिशें आने वाले वर्षों में वेतन और पेंशन संरचना को नई दिशा दे सकती हैं।




