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रामलीला केवल मंचन नहीं, संस्कारों की अमर विरासत है; संजय मिश्रा बबलू

लक्ष्मीकान्त पाठक। वेबवार्ता

हरदोई। भारतीय संस्कृति की आत्मा में रची-बसी रामलीला की परंपरा आज भी समाज को मर्यादा, त्याग और आदर्श जीवन का संदेश दे रही है। इसी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए शाहाबाद के गाँव सिकंदरपुर कल्लू में रामलीला मेला समिति की ओर से आयोजित रामलीला का शुभारंभ नगर के प्रमुख व्यवसायी एवं समाजसेवी संजय मिश्रा बबलू ने किया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने और उनके बताए मर्यादा पथ पर चलने का आह्वान किया गया।रामलीला मंच से अपने संबोधन में संजय मिश्रा बबलू ने कहा कि भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कारों से जोड़ने वाला पुनीत कार्य है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श आचरण की ऐसी अनुपम गाथा है, जो युगों-युगों से मानवता का पथ आलोकित करती आ रही है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण में मर्यादा और व्यवहार में विनम्रता का समावेश कर सकता है। उन्होंने रामलीला के आयोजन के लिए समिति के पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं।

रामलीला में जीवंत होते हैं श्रीराम के आदर्श

इस अवसर पर शाहाबाद के प्रमुख समाजसेवी एवं पठकाना मेला समिति के व्यवस्थापक ऋषिकुमार मिश्रा ने कहा कि भगवान श्रीराम की मर्यादा और उनके आदर्श चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हमारे पूर्वजों ने अथक प्रयास किए। रामलीला उसी गौरवशाली परंपरा की कड़ी है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती रही है। इस विरासत को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का नैतिक दायित्व है।उन्होंने कहा कि रामलीला के मंच पर जब प्रभु श्रीराम के चरित्र का सजीव चित्रण होता है, तो उनके आदर्श केवल कथा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जनमानस के हृदय में उतरकर जीवन को दिशा देते हैं। राम का चरित्र हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी ही कठिन क्यों न हों, सत्य और कर्तव्य का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उनके आदर्शों में परिवार के प्रति समर्पण, समाज के प्रति दायित्व और मानवीय मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा का संदेश निहित है।
ऋषिकुमार मिश्रा ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की सार्थकता तभी है, जब उनसे मिलने वाली सीख हमारे व्यवहार और आचरण में दिखाई दे। उन्होंने क्षेत्रीय लोगों से दशहरा पर्व पर पठकाना रामलीला मैदान पहुंचकर उत्सव में सहभागी बनने की अपील की।रामलीला का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश भी दे रहा है। कार्यक्रम में रामलीला समिति सिकंदरपुर कल्लू के पदाधिकारी, सहयोगी और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

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