रामनिवास शर्मा। वेबवार्ता
दतिया( मध्यप्रदेश) नाम बड़े और कारोबार नकली—दतिया में ब्रांडेड उत्पादों की आड़ में कथित फर्जीवाड़े का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बाजार में बिकने वाले उत्पादों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिगना थाना पुलिस ने सिकंदरा स्थित एक फैक्टरी में छापेमारी कर Tata DEF के नाम से कथित तौर पर नकली उत्पाद तैयार करने के कारोबार का खुलासा किया है। पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में Tata DEF के नाम वाली खाली बाल्टियां, कथित नकली बारकोड और लिक्विड तैयार करने में इस्तेमाल की जाने वाली यूरिया समेत अन्य सामग्री बरामद होने की बात सामने आई है।
मामले की शुरुआत Tata Motors की ओर से अधिकृत बौद्धिक संपदा संरक्षण एजेंसी Protect IP India Private Limited के जांच अधिकारी की शिकायत से हुई। शिकायत के आधार पर जिगना थाना पुलिस ने सिकंदरा में स्थित फैक्टरी पर कार्रवाई की। छापे के दौरान मिली सामग्री ने पुलिस की जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
ब्रांडेड नाम के पीछे चल रहा था कथित खेल
पुलिस के अनुसार, फैक्टरी में Tata DEF के नाम और पैकिंग से संबंधित सामग्री मौजूद थी। मौके से खाली बाल्टियां और कथित नकली बारकोड मिलने के बाद यह जांच का विषय बन गया कि इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और क्या इनके जरिए कथित नकली उत्पाद को बाजार में असली ब्रांड के नाम पर पहुंचाने की तैयारी थी।
लिक्विड तैयार करने में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री भी पुलिस को मौके से मिली। बरामद यूरिया और अन्य सामान को कब्जे में लेकर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फैक्टरी में वास्तविक रूप से किस तरह का उत्पाद तैयार किया जा रहा था और उसकी सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा था।
खाली पैकिंग ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
नकली कारोबार में पैकिंग और पहचान सबसे अहम कड़ी होती है। ऐसे में किसी प्रतिष्ठित ब्रांड के नाम से जुड़ी खाली बाल्टियों और कथित नकली बारकोड की बरामदगी ने जांच अधिकारियों का ध्यान इस दिशा में खींचा है कि कहीं तैयार किए जा रहे कथित उत्पाद को ब्रांडेड माल के रूप में बाजार में खपाने की योजना तो नहीं थी।
हालांकि बरामद सामग्री का वास्तविक उपयोग और उत्पाद की प्रकृति जांच तथा संबंधित परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस अब फैक्टरी में मौजूद अन्य सामान, पैकिंग सामग्री और कथित निर्माण प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रही है।
एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा
जिगना थाना पुलिस ने मामले में एक आरोपी के खिलाफ कॉपीराइट अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। कार्रवाई के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर कथित कारोबार के स्रोत और संभावित खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
जांच का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि यदि कथित नकली उत्पाद तैयार किया जा रहा था तो उसकी सप्लाई कहां तक पहुंची? क्या यह कारोबार केवल सिकंदरा स्थित फैक्टरी तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? पुलिस इन बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है।
बाजार तक पहुंची या नहीं, जांच में खुलेगा राज
छापेमारी के बाद अब पुलिस के सामने अगली चुनौती कथित कारोबार की पूरी कड़ी तक पहुंचने की है। बरामद पैकिंग, बारकोड और निर्माण सामग्री के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित उत्पाद किस स्तर पर तैयार किया जा रहा था और उसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
फिलहाल जिगना पुलिस की कार्रवाई ने सिकंदरा की इस फैक्टरी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रांड के नाम पर कथित नकली कारोबार का यह खेल कितना पुराना था, कितनी मात्रा में माल तैयार हुआ और इसके पीछे कितने लोग जुड़े हैं—इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच से सामने आएंगे।




