— कांतिलाल मांडोत — 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका, मजबूत कूटनीति और वैश्विक विश्वास का प्रभावशाली उदाहरण है। इस यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ विश्वास, सम्मान और साझेदारी के आधार पर संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। सेशेल्स जैसे छोटे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश के साथ भारत के संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय जुड़ाव भी उतना ही गहरा है।
सेशेल्स पहुँचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जो किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख के प्रति सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई, जिसमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, तटीय निगरानी क्षमता बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में कई समझौतों पर भी विचार किया गया।
भारत लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता रहा है। सेशेल्स इस दृष्टि से भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है, क्योंकि यह देश उन समुद्री मार्गों के निकट स्थित है, जिनसे दुनिया का बड़ा व्यापार संचालित होता है। ऐसे में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, मानव तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों पर नियंत्रण के लिए भारत और सेशेल्स का सहयोग पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल ‘लेस्पवार’ सेशेल्स को सौंपा, जिससे वहाँ की कोस्ट गार्ड की क्षमता और अधिक मजबूत होगी। यह केवल एक रक्षा सहयोग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की तकनीकी क्षमता और मित्र देशों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। भारत पहले भी सेशेल्स को समुद्री निगरानी विमान और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास लगातार मजबूत हुआ है।
इस यात्रा की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के प्रति विश्व समुदाय के सम्मान को भी दर्शाती है। किसी दूसरे देश की संसद को संबोधित करना दोनों देशों के बीच गहरे राजनीतिक विश्वास और परस्पर सम्मान का प्रमाण माना जाता है।
भारत और सेशेल्स के बीच संबंधों का इतिहास लगभग ढाई सौ वर्षों से भी अधिक पुराना है। जब वर्ष 1770 में यहाँ पहली स्थायी बस्ती बसाई गई, तब वहाँ पहुँचने वाले पहले लोगों में पाँच भारतीय भी शामिल थे। बाद के वर्षों में बिहार, तमिलनाडु और गुजरात से बड़ी संख्या में भारतीय यहाँ जाकर बसे और उन्होंने व्यापार, कृषि, निर्माण तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भी सेशेल्स की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय मूल का है, जिसने दोनों देशों के संबंधों को पीढ़ी दर पीढ़ी मजबूत बनाए रखा है।
सेशेल्स के पूर्व राष्ट्रपति वेवेल रामकलावन के पूर्वज भी भारत के बिहार राज्य से जुड़े रहे हैं। यह तथ्य दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है। भारतीय मूल के लोग वहाँ केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के नेशनल बोटैनिकल गार्डन का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपति के साथ पौधारोपण किया और प्रसिद्ध एल्डाब्रा विशालकाय कछुओं को पत्तियाँ खिलाईं। यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और प्रकृति के प्रति साझा जिम्मेदारी का संदेश देता है। सेशेल्स अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ समुद्री जीवों और विश्व प्रसिद्ध एल्डाब्रा विशालकाय कछुओं के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है।
सेशेल्स का भौगोलिक क्षेत्रफल भले ही बहुत छोटा हो, लेकिन इसका समुद्री आर्थिक क्षेत्र अत्यंत विशाल है। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी शक्तियाँ इस क्षेत्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानती हैं। भारत हमेशा इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और साझेदारी की नीति पर विश्वास करता आया है। यही सोच भारत को अन्य देशों से अलग पहचान दिलाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह केवल एक वर्षगांठ नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास, मित्रता और साझा विकास की सफल यात्रा का उत्सव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह यात्रा आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के साझा लक्ष्य को नई गति प्रदान करेगी।
आज जब पूरी दुनिया बदलते वैश्विक समीकरणों और नई चुनौतियों का सामना कर रही है, तब भारत की विदेश नीति विश्व बंधुत्व, आपसी सम्मान और समान विकास के सिद्धांतों पर आगे बढ़ रही है। भारत छोटे और विकासशील देशों को बराबरी का सम्मान देता है और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग प्रदान करता है। यही कारण है कि भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है।
सेशेल्स यात्रा ने यह भी सिद्ध कर दिया कि भारत केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाने के लिए अपने मित्र देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। आने वाले समय में यह साझेदारी समुद्री सुरक्षा, व्यापार, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में नई उपलब्धियाँ हासिल करेगी।
भारत और सेशेल्स की यह मित्रता केवल सरकारों के बीच संबंध नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, अपनत्व और साझा भविष्य की मजबूत नींव है। यही कारण है कि यह यात्रा आने वाले वर्षों में भारत की सफल कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद की जाएगी।





