अजमेर शरीफ, राजस्थान | वेब वार्ता
ख्वाजा गरीब नवाज हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह के विशेष जियारत (छोटा उर्स, माहे मुहर्रम) के अवसर पर Khwaja Garib Nawaz Urs 2026 के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिन्द द्वारा आयोजित छह दिवसीय निःशुल्क मेडिकल कैंप का सफल आयोजन किया जा रहा है। 17 जून से 27 जून 2026 तक अजमेर शरीफ स्थित क़ायद-ए-विश्राम स्थली मैदान में संचालित इस कैंप में कुल 1415 जायरीन और मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा उन्हें निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर आयोजित इस सेवा अभियान का उद्देश्य उर्स में शामिल होने वाले लाखों जायरीन को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना था। भीषण गर्मी और अत्यधिक भीड़ के बावजूद डॉक्टरों, स्वयंसेवकों और आयोजकों ने समर्पण और सेवा भावना के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
- ख्वाजा गरीब नवाज उर्स के दौरान छह दिवसीय निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित
- 1415 जायरीन और मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
- मुफ्त दवाइयां और चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया गया
- दरगाह प्रशासन ने जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की सेवाओं को सराहा
- मौलाना महमूद मदनी ने डॉक्टरों और स्वयंसेवकों की प्रशंसा की
Khwaja Garib Nawaz Urs 2026 में चिकित्सा सेवा का विशेष आयोजन
जमीयत उलेमा जिला अजमेर शरीफ की निगरानी में आयोजित इस मेडिकल कैंप में देश के विभिन्न राज्यों और दूरदराज़ क्षेत्रों से आने वाले जायरीन को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। उर्स के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए यह कैंप स्थापित किया गया था।
कैंप में आने वाले मरीजों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। आयोजन समिति के अनुसार बड़ी संख्या में गर्मी, थकान, संक्रमण और सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित मरीजों को उपचार प्रदान किया गया।
इन चिकित्सकों ने दी अपनी सेवाएं
मेडिकल कैंप में कई अनुभवी चिकित्सकों और सहयोगियों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इनमें डॉ. सलीम अहमद (किशनगढ़), डॉ. अब्दुल वाजिद (ओंटरा), डॉ. अब्दुल कादिर (ओंटरा), डॉ. राम गिरी (किशनगढ़) तथा नजमा बानो शामिल रहीं।
आयोजकों के अनुसार चिकित्सकीय टीम ने लगातार छह दिनों तक सेवाएं देकर हजारों जायरीन को राहत पहुंचाई।
जमीयत के पदाधिकारियों ने संभाली व्यवस्थाएं
केंद्रीय कार्यालय की ओर से मौलाना अलीमुद्दीन अजमेरी और मौलाना मोहम्मद कामिल मेरठी पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे। वहीं क़ारी कमरुद्दीन ख़ाँ, अध्यक्ष जमीयत उलेमा जिला अजमेर शरीफ, तथा अन्य कार्यकर्ताओं ने कैंप संचालन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी भी लगातार आयोजकों के संपर्क में रहे और व्यवस्थाओं की जानकारी लेते रहे।
1970 से जारी है सेवा की परंपरा
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द वर्ष 1970 से ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स के अवसर पर सामाजिक और चिकित्सीय सेवाएं प्रदान करती आ रही है। कुछ वर्षों तक यह सिलसिला बाधित रहा, लेकिन सेवा और मानवता की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इसे पुनः सक्रिय किया गया।
संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि जमीयत के अधिकांश बुजुर्गों का आध्यात्मिक संबंध हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह से रहा है और उनकी शिक्षाओं से विशेष प्रेरणा प्राप्त होती है।
| मुख्य तथ्य | विवरण |
|---|---|
| आयोजन अवधि | 17 जून – 27 जून 2026 |
| स्थान | क़ायद-ए-विश्राम स्थली मैदान, अजमेर शरीफ |
| लाभान्वित जायरीन | 1415 |
| सेवा | निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवाइयां |
दरगाह प्रशासन ने किया सम्मानित
मेडिकल कैंप के समापन पर दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर शरीफ के प्रशासन और दरगाह कमेटी ने जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की सेवाओं की विशेष सराहना की। दरगाह के नाज़िम एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद बिलाल ख़ान ने जमीयत की टीम को प्रशस्ति-पत्र और सम्मान-पत्र प्रदान किया।
प्रशस्ति-पत्र में जायरीन की सेवा, चिकित्सा सहायता और प्रशासनिक सहयोग के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के प्रयासों को अनुकरणीय बताया गया।
मौलाना महमूद मदनी ने जताया संतोष
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने डॉक्टरों, स्वयंसेवकों और आयोजकों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि मानव सेवा संगठन की जीवंत परंपरा और उसके बुजुर्गों की विरासत है।
उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और कम समय के बावजूद जायरीन-ए-ख्वाजा को उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी मानवता और सेवा की भावना के साथ ऐसे कल्याणकारी कार्यक्रम जारी रहेंगे।
ख्वाजा गरीब नवाज की शिक्षाएं प्रेम, सेवा और मानवता का संदेश देती हैं। अजमेर शरीफ में आयोजित यह मेडिकल कैंप उसी संदेश को व्यवहारिक रूप देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे हजारों जायरीन को प्रत्यक्ष लाभ मिला।
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