रायपुर, 16 जून (वेब वार्ता)। मानसून के आगमन और वन्यजीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों को पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी 15 जून से जंगल सफारी और पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है, जो आगामी 1 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद 2 अक्टूबर से वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर पर्यटकों के लिए जंगलों के द्वार फिर खोल दिए जाएंगे।
पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया कि मानसून शुरू होने से पहले संरक्षित वन क्षेत्रों को बंद करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वर्षा ऋतु के दौरान प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सुरक्षित बनाए रखना है।
वन्यजीवों के प्रजनन काल में मिलेगी सुरक्षा
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्षा ऋतु अधिकांश वन्य प्रजातियों के लिए अत्यंत संवेदनशील अवधि होती है। इसी दौरान कई वन्यजीव प्रजनन करते हैं और अपने शावकों का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे समय में पर्यटन गतिविधियों से होने वाली मानवीय आवाजाही उनके प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
इसी कारण वन्यजीवों को शांत और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जंगलों में पर्यटकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। वन विभाग का मानना है कि यह कदम वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
बारिश में बढ़ जाता है जोखिम
विभाग ने बताया कि मानसून के दौरान जंगलों के भीतर स्थित कच्चे मार्ग और सफारी पथ लगातार बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने और रास्तों में जलभराव होने से आवागमन जोखिमपूर्ण हो जाता है। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी यह निर्णय लिया गया है।
इन संरक्षित क्षेत्रों में रहेगा प्रवेश प्रतिबंधित
अगले साढ़े तीन महीनों तक प्रदेश के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- अचानकमार टाइगर रिजर्व
- उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व
- बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य
- कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
- प्रदेश के अन्य सभी अधिसूचित अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र
बंद अवधि में होंगे संरक्षण और रखरखाव के कार्य
पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद रहने के दौरान वन विभाग विभिन्न संरक्षणात्मक और विकासात्मक गतिविधियों को प्राथमिकता देगा।
इस अवधि में अवैध शिकार की रोकथाम के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी तथा वन्यजीवों की निगरानी को और सुदृढ़ किया जाएगा। इसके साथ ही जंगलों के प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा।
आगामी पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए सफारी मार्गों, पर्यटन ट्रैकों और विश्राम सुविधाओं के रखरखाव तथा मरम्मत का कार्य भी किया जाएगा, ताकि 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पर्यटन सत्र में पर्यटकों को बेहतर और सुरक्षित अनुभव उपलब्ध कराया जा सके।
सतत पर्यटन और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण करने पहुंचते हैं, लेकिन मानसून के दौरान दिया जाने वाला यह ‘ग्रीन ब्रेक’ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रकृति और पर्यटन के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए इस प्रकार की पहल आवश्यक है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम के रूप में देखा जा रहा है।
वन्यजीव प्रेमियों के लिए भले ही यह कुछ महीनों का इंतजार हो, लेकिन प्रकृति को पुनर्जीवित होने और वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए यह विराम अत्यंत जरूरी माना जा रहा है। आगामी 2 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ के जंगल एक बार फिर नए उत्साह और रोमांच के साथ सैलानियों का स्वागत करने के लिए तैयार होंगे।




