ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच ओमान तट के पास जहाज पर हमला, तीन भारतीय नाविकों की मौत

नई दिल्ली/तेहरान, 11 जून (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ओमान तट के निकट एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई है। पलाऊ के ध्वज वाले तेल एवं रासायनिक उत्पाद ले जा रहे एमटी सेट्टेबेलो नामक पोत पर हुए इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अमेरिकी नौसेना की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास ने संभाला मोर्चा

ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि शिनस बंदरगाह के निकट एक पोत पर हमले की सूचना मिली है और दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि वह ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों की निगरानी कर रहा है।

मंत्रालय ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात को सामान्य बनाने की अपील की है।

तीन भारतीयों की मौत से परिवारों में मातम

हमले में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया शामिल हैं। शिवानंद की मौत की खबर मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के अनुसार वह पिछले कई महीनों से समुद्री जहाज पर काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।

शिवानंद के जीजा संजय चौरसिया ने बताया कि घटना से कुछ समय पहले ही परिवार की उनसे बातचीत हुई थी। उनके पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि पिछली रात करीब नौ बजे उन्होंने फोन पर परिवार को सब कुछ सामान्य होने की जानकारी दी थी। शिवानंद अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं।

हमीरपुर के आदित्य शर्मा ने भी गंवाई जान

इस घटना में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर निवासी आदित्य शर्मा की भी मौत हुई है। वह जहाज पर डेक कैडेट के रूप में कार्यरत थे। परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच और पार्थिव शरीर को शीघ्र भारत लाने की मांग की है।

परिजनों ने सवाल उठाया कि संघर्षग्रस्त क्षेत्र में जहाज को आगे बढ़ाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग करते हुए जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है।

तीसरे मृतक नाविक की पहचान आंध्र प्रदेश के निवासी के रूप में बताई गई है, हालांकि उनकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अमेरिकी नौसेना की भूमिका पर गंभीर आरोप

फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना को जहाज पर सवार चालक दल की राष्ट्रीयता की पूरी जानकारी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया था तो जहाज को हिरासत में लेने जैसे विकल्प मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी बलों को यह जानकारी नहीं थी कि जहाज पर कितने भारतीय और अन्य देशों के नागरिक सवार थे। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

केंद्र सरकार ने जताया शोक

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तीन भारतीय नाविकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बड़ी क्षति है और केंद्र सरकार शोक संतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।

उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को बचाए गए चालक दल के सदस्यों की तत्काल स्वदेश वापसी तथा मृतकों के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए भारत लाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

जहाज पर कैसे हुआ हमला?

जानकारी के अनुसार पलाऊ के ध्वज वाले एमटी सेट्टेबेलो पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। प्रारंभिक जानकारी में 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन नाविक लापता बताए गए थे। बाद में इन तीनों की मौत की पुष्टि हो गई।

बताया गया कि ओमान के सोहार बंदरगाह से लगभग 37 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में जहाज के इंजन कक्ष में आग लग गई थी। आपातकालीन सहायता की अपील के बाद ओमान की शाही नौसेना ने बचाव अभियान चलाकर कई लोगों को सुरक्षित निकाला।

संयुक्त राष्ट्र ने शांति की अपील की

घटना के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास शांति बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही बाधित होने से वैश्विक अस्थिरता बढ़ रही है और इसका असर विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

वहीं अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि संबंधित पोत ईरानी तेल ले जा रहा था और चालक दल ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन नहीं किया था। हालांकि इस दावे और भारतीय नाविकों की मौजूदगी के बावजूद हुई कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा अब केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। तीन भारतीय नाविकों की मौत ने न केवल कई परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया है, बल्कि संघर्ष क्षेत्र में नागरिक जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

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