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सेबी की कार्रवाई से राजेश एक्सपोर्ट्स में हड़कंप, शेयर 5% लोअर सर्किट पर

मुंबई, 04 जून (वेब वार्ता)। सोना और आभूषण कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स को लेकर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की बड़ी कार्रवाई के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। सेबी द्वारा कंपनी और उसके प्रवर्तक राजेश मेहता पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए जाने के बाद गुरुवार को कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई और शेयर 5 प्रतिशत के निचले सर्किट पर पहुंच गया।

बंबई शेयर बाजार और राष्ट्रीय शेयर बाजार में कंपनी का शेयर गिरकर करीब 104 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की अंतरिम कार्रवाई ने निवेशकों के विश्वास को बड़ा झटका पहुंचाया है।

राजस्व बढ़ाकर दिखाने का आरोप

सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपने समेकित राजस्व को वास्तविक आंकड़ों की तुलना में अत्यधिक बढ़ाकर प्रस्तुत किया। जांच में पाया गया कि घोषित राजस्व का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर वास्तविक कारोबारी गतिविधियों से जुड़ा नहीं था।

नियामक के अनुसार कंपनी के वास्तविक कारोबार और वित्तीय विवरणों में दर्ज आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर पाया गया, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।

फर्जी लेनदेन और संबंधित पक्षों की भूमिका पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी की पुस्तकों में कुछ ऐसे लेनदेन दर्ज थे, जिनकी सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। सेबी ने आरोप लगाया है कि संबंधित संस्थाओं के माध्यम से खरीद और बिक्री के ऐसे चक्र बनाए गए, जिनसे कारोबार का आकार वास्तविकता से अधिक दिखाया जा सके।

जांच के दौरान जिन संस्थाओं का नाम सामने आया, उनमें से एक ने कथित तौर पर यह स्पष्ट किया कि उसका कंपनी के साथ वैसा कारोबारी संबंध नहीं था जैसा वित्तीय दस्तावेजों में दर्शाया गया था।

कंपनी के धन के उपयोग पर भी सवाल

सेबी की जांच में कंपनी के धन के उपयोग और विभिन्न खातों के बीच हुए लेनदेन की भी समीक्षा की गई। नियामक ने आरोप लगाया है कि कुछ वित्तीय लेनदेन निर्धारित कॉरपोरेट प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों के अनुरूप नहीं थे।

पूंजी बाजार के नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों को शेयरधारकों के हितों की रक्षा करते हुए वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य होता है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाता है।

शिकायत से शुरू हुई जांच

जानकारी के अनुसार मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद सेबी ने कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की थी। शिकायत में कंपनी की बैलेंस शीट में लंबे समय से दिखाए जा रहे बड़े व्यापारिक बकायों पर सवाल उठाए गए थे।

प्रारंभिक जांच में वित्तीय आंकड़ों और नकदी प्रवाह के बीच असंगति दिखाई देने के बाद नियामक ने विस्तृत जांच के आदेश दिए। इसके लिए विशेष जांच दल गठित किया गया और फोरेंसिक ऑडिट भी कराया गया।

निवेशकों की चिंता बढ़ी

सेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी के भविष्य को लेकर बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। कंपनी में कई बड़े संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी है। इनमें Life Insurance Corporation of India भी शामिल है, जिसकी कंपनी में उल्लेखनीय हिस्सेदारी बताई जाती है।

विश्लेषकों का कहना है कि नियामकीय जांच और आरोपों के कारण निकट भविष्य में कंपनी के शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सेबी की कार्रवाई ने एक बार फिर कॉरपोरेट पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और निवेशकों के हितों की सुरक्षा को लेकर बाजार में बहस को तेज कर दिया है।

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