वाशिंगटन, 04 जून (वेब वार्ता)। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौता वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से जुड़े लगभग 99 प्रतिशत मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बन चुकी है और केवल एक प्रतिशत विषयों पर चर्चा शेष है।
सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच अधिकांश मुद्दों का समाधान हो चुका है और अब केवल कुछ तकनीकी तथा कानूनी पहलुओं पर अंतिम सहमति बनना बाकी है। उन्होंने बताया कि इन लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए वह जल्द ही केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे।
उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ताओं में दोनों पक्षों को कुछ न कुछ समझौता करना पड़ता है और यही किसी भी सफल समझौते की आधारशिला होती है। उनके अनुसार जब दो देशों के बीच व्यापारिक समझौता तैयार किया जाता है तो उसका उद्देश्य दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करना होता है।
अंतिम चरण में पहुंची बातचीत
सर्जियो गोर ने कहा कि समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन जाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि अब जो मुद्दे शेष हैं, वे किसी बड़े नीतिगत मतभेद से जुड़े नहीं हैं, बल्कि तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।
हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह बताने से इनकार कर दिया कि किन विषयों पर अभी भी चर्चा जारी है। उनका कहना था कि इस स्तर की वार्ताओं में कुछ संवेदनशील मुद्दों को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।
भारतीय वार्ताकारों की सराहना
अमेरिकी राजदूत ने व्यापार समझौते पर बातचीत कर रही भारतीय टीम की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिनिधियों ने अपने देश के आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए प्रभावी ढंग से बातचीत की है।
सर्जियो गोर के अनुसार भारत की वार्ता टीम ने कई मुद्दों पर मजबूत और स्पष्ट रुख अपनाया, जिसके कारण बातचीत चुनौतीपूर्ण जरूर रही, लेकिन इससे भारत के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
भारत के सख्त रुख का भी किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में भारत की नीतियां और बाजार संबंधी शर्तें काफी सख्त रही हैं, जिसके कारण विदेशी कंपनियों और व्यापारिक भागीदारों के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच आसान नहीं रही। उनके अनुसार यही कारण है कि कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को अंतिम रूप लेने में लंबा समय लगता है।
सर्जियो गोर ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के साथ बड़े व्यापारिक समझौतों पर बातचीत अक्सर लंबी प्रक्रिया साबित होती है, क्योंकि भारत अपने आर्थिक हितों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत
हालांकि कुछ मुद्दे अभी भी लंबित हैं, लेकिन अमेरिकी राजदूत ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द अंतिम रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता संपन्न होता है तो इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही निवेश, निर्यात और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में भी नए अवसर खुल सकते हैं।




