नई दिल्ली, 04 जून (वेब वार्ता)। दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड में अधिकांश लोगों की मौत आग की लपटों से नहीं, बल्कि धुएं के कारण दम घुटने से हुई है। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर यह जानकारी दी है। हादसे में घायल कई लोगों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और उनका उपचार गहन चिकित्सा इकाई में चल रहा है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार अग्निकांड के बाद कुल 39 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। इनमें 18 लोगों को मृत अवस्था में लाया गया, जिनमें नौ पुरुष और नौ महिलाएं शामिल थीं। वहीं 15 मरीजों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया गया, जिनमें से आठ मरीज वेंटिलेटर पर हैं और उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
अस्पताल के समूह निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा ने बताया कि मृतकों की मौत का प्रमुख कारण धुएं के कारण दम घुटना रहा। उन्होंने कहा कि आग लगने की स्थिति में धुआं सबसे पहले लोगों तक पहुंचता है और जब व्यक्ति धुएं को सांस के साथ अंदर लेता है तो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगता है। इससे व्यक्ति बेहोश हो सकता है और समय पर सहायता नहीं मिलने पर उसकी मृत्यु हो सकती है।
जहरीली गैसों ने बढ़ाया खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार आग लगने के दौरान प्लास्टिक, पीवीसी और अन्य कृत्रिम पदार्थों के जलने से अत्यंत जहरीली गैसें उत्पन्न होती हैं। ये गैसें फेफड़ों सहित शरीर के विभिन्न अंगों को गंभीर क्षति पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा अत्यधिक गर्म धुआं श्वसन तंत्र और फेफड़ों में गंभीर चोट का कारण भी बनता है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार अग्निकांड में जान गंवाने वाले अधिकांश लोगों की आयु 30 से 50 वर्ष के बीच थी।
जान बचाने के लिए तीसरी और चौथी मंजिल से कूदे लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद होटल की ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों के सामने कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा था। धुआं तेजी से कमरों में भर रहा था और लोग भयभीत होकर बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे। कई लोगों ने जान बचाने के लिए तीसरी और चौथी मंजिल से छलांग लगाने का जोखिम उठाया।
इस दौरान कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। चिकित्सकों ने बताया कि ऊंचाई से कूदने वाले कई मरीजों के हाथ-पैर, लंबी हड्डियों तथा श्रोणि की हड्डियों में फ्रैक्चर पाया गया है। एक मरीज की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई है, जिसकी शल्य चिकित्सा की जा रही है।
एक फोन कॉल ने बचाई जान
हादसे के बीच एक सुखद संयोग भी सामने आया। गिनी के नागरिक बहत्रिमदिजिउ पिछले दो महीने से उसी होटल में ठहरे हुए थे। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह उनके पिता का फोन आया, जिसके बाद वह अस्पताल चले गए थे। इसी दौरान होटल में भीषण आग लग गई।
बहत्रिमदिजिउ ने कहा कि यदि वह उस समय होटल में मौजूद होते तो संभवतः इस दुर्घटना की चपेट में आ सकते थे। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा संयोग बताया।
जांच और राहत कार्य जारी
अग्निकांड के कारणों की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है। पुलिस, अग्निशमन विभाग और फोरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लगे हुए हैं। वहीं अस्पतालों में भर्ती घायलों के उपचार पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बहुमंजिला इमारतों और होटलों में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।




