पुणे, 03 जून (वेब वार्ता)। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और फिलहाल संघर्ष विराम जैसी स्थिति बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ी तो भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने यह मानक स्थापित किया है कि भारत किसी भी उकसावे का जवाब किस प्रकार देता है।
सेना प्रमुख ने यह बात पुणे के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की 150वीं पासिंग आउट परेड के दौरान कही। इस अवसर पर उन्होंने 355 कैडेट अधिकारियों की परेड की सलामी ली। उल्लेखनीय है कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी स्वयं भी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 65वें कोर्स के कैडेट रह चुके हैं और चार्ली स्क्वाड्रन का हिस्सा थे।
अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने नवोदित अधिकारियों से कहा कि आधुनिक युद्ध पूरी तरह पारदर्शी हो चुका है, जहां प्रत्येक गतिविधि पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाती है। ऐसे में सैन्य अभियानों, सैनिकों की तैनाती और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्कता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्य की लड़ाइयां केवल जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर क्षेत्र, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और सूचना युद्ध भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जनरल द्विवेदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन को भविष्य की सैन्य शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि युद्ध की बढ़ती गति और जटिलता को देखते हुए आधुनिक तकनीकों का उपयोग अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सेना के प्रत्येक जवान को ड्रोन संचालन में दक्ष बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और बताया कि इसके लिए विभिन्न सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
थिएटर कमांड व्यवस्था पर बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और संबंधित रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंप दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो से तीन वर्षों में यह व्यवस्था धरातल पर दिखाई देने लगेगी। नई प्रणाली के तहत तीनों सेनाओं के प्रमुख अपने-अपने बलों की तैयारी और संसाधनों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि थिएटर कमांडर संयुक्त सैन्य अभियानों का संचालन करेंगे।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ‘बदलाव के दशक’ पहल के तहत स्वयं को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बल में परिवर्तित कर रही है। सेना में नई तकनीक आधारित सैन्य संरचनाओं का विकास किया जा रहा है, जिसमें युवा अधिकारियों और सैनिकों की भूमिका को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
परेड में भारतीय सेनाओं में शामिल होने वाले 355 कैडेटों को कमीशन प्रदान किया गया। इस बैच में 12 मित्र देशों के 24 कैडेट और 18 महिला कैडेट भी शामिल थीं। समारोह के दौरान लड़ाकू विमानों, हेलिकॉप्टरों और स्काईडाइविंग टीमों ने आकर्षक प्रदर्शन कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया सैन्य अभियान था। सेना प्रमुख के ताजा बयान को भारत की सुरक्षा रणनीति और सैन्य तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




