खेलटेस्ट क्रिकेट में बड़ा बदलाव, खराब रोशनी में...

टेस्ट क्रिकेट में बड़ा बदलाव, खराब रोशनी में गुलाबी गेंद के उपयोग को मंजूरी

नई दिल्ली, 02 जून (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने टेस्ट क्रिकेट के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए खराब रोशनी के दौरान गुलाबी गेंद के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का उद्देश्य दिन के खेल को समय से पहले समाप्त होने से बचाना और मुकाबलों में अधिक से अधिक ओवर पूरे कराना है। फिलहाल इस व्यवस्था को परीक्षण के आधार पर लागू किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, 31 मई को अहमदाबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। अक्सर टेस्ट मैचों में खराब रोशनी के कारण अंपायर दिन का खेल निर्धारित समय से पहले समाप्त कर देते हैं, जिससे मुकाबले के कुल ओवरों की संख्या प्रभावित होती है। अब ऐसी परिस्थितियों में गुलाबी गेंद के उपयोग का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

हालांकि इस नियम को लागू करने के लिए दोनों टीमों की सहमति आवश्यक होगी। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तभी खराब रोशनी के दौरान लाल गेंद की जगह गुलाबी गेंद का उपयोग किया जा सकेगा।

2015 में खेला गया था पहला गुलाबी गेंद टेस्ट

क्रिकेट इतिहास का पहला दिन-रात्रि टेस्ट मुकाबला वर्ष 2015 में खेला गया था। उस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को तीन विकेट से हराया था। इसके बाद विभिन्न देशों के बीच समय-समय पर गुलाबी गेंद से टेस्ट मुकाबले आयोजित किए जाते रहे हैं। गुलाबी गेंद को कृत्रिम रोशनी और कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में अधिक स्पष्ट माना जाता है।

ड्रिंक्स ब्रेक में मैदान पर आ सकेंगे कोच

बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया। नए प्रावधान के तहत अब ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान कोच खिलाड़ियों से बातचीत करने के लिए मैदान में प्रवेश कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे टीमों को रणनीति बनाने और खिलाड़ियों को तत्काल मार्गदर्शन देने में मदद मिलेगी।

संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन पर भी सख्ती

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने गेंदबाजों के संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की निगरानी को और प्रभावी बनाने का भी फैसला किया है। अब मैच अधिकारियों को हॉक-आई आंकड़ों तक पहुंच मिलेगी, जिससे गेंदबाजों की भुजा की गतिविधियों और गेंद फेंकने की तकनीक का अधिक सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा।

यह नया प्रावधान एक अक्टूबर से लागू किया जाएगा। परिषद का मानना है कि तकनीक के उपयोग से संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की पहचान अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जा सकेगी।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि खराब रोशनी में गुलाबी गेंद के उपयोग और तकनीकी निगरानी बढ़ाने जैसे फैसले टेस्ट क्रिकेट को और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा दर्शकों के लिए आकर्षक बनाने में सहायक साबित हो सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -