नई दिल्ली, 02 जून (वेब वार्ता)। 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। अब तक जहां वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता और फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चा हो रही थी, वहीं अब सेवानिवृत्त केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था में बदलाव के प्रस्ताव भी प्रमुखता से सामने आने लगे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत पेंशन का प्रस्ताव
कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि वर्तमान में अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर मिलने वाली पेंशन को बढ़ाकर 67 प्रतिशत किया जाए। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को देखते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अधिक वित्तीय सुरक्षा आवश्यक है।
इसके साथ ही एक संसदीय समिति की सिफारिश का हवाला देते हुए यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि 65 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक पांच वर्ष पर पेंशन में क्रमिक वृद्धि की व्यवस्था लागू की जाए।
प्रस्तावित पेंशन संरचना
कर्मचारी संगठनों द्वारा सुझाए गए प्रारूप के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ पेंशन की राशि भी बढ़ाई जा सकती है।
| आयु (वर्ष) | अंतिम वेतन का प्रस्तावित प्रतिशत |
|---|---|
| 65 | 70 प्रतिशत |
| 70 | 75 प्रतिशत |
| 75 | 80 प्रतिशत |
| 80 | 85 प्रतिशत |
| 85 | 90 प्रतिशत |
| 90 | 100 प्रतिशत |
यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है, तो 90 वर्ष की आयु पूरी करने पर कर्मचारी को उसके अंतिम वेतन के बराबर पेंशन मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
पेंशन योजना चुनने की स्वतंत्रता की मांग
कर्मचारी संगठनों ने यह मांग भी उठाई है कि कर्मचारियों को अपनी आवश्यकता और वित्तीय प्राथमिकताओं के अनुसार पेंशन योजना चुनने का विकल्प दिया जाए। इसके लिए तीन प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया गया है।
पुरानी पेंशन योजना
इस योजना में सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन का प्रावधान होता है। पेंशन की गणना अंतिम वेतन और महंगाई भत्ते के आधार पर की जाती है। इसका पूरा वित्तीय भार सरकार वहन करती है और कर्मचारी से किसी प्रकार का अतिरिक्त अंशदान नहीं लिया जाता।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली
इस व्यवस्था में कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली राशि संचित निधि और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। इसमें निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती।
एकीकृत पेंशन योजना
यह योजना पुरानी पेंशन योजना और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का मिश्रित स्वरूप मानी जाती है। इसमें अंशदान की व्यवस्था भी रहती है और न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
कर्मचारियों की क्या है मांग?
कई कर्मचारी संगठनों का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन को शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनका कहना है कि कर्मचारियों को ऐसी व्यवस्था मिलनी चाहिए जो उन्हें वृद्धावस्था में स्थिर आय और आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सके।
हालांकि 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें अभी सामने नहीं आई हैं, लेकिन पेंशन सुधार से जुड़े ये प्रस्ताव लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनमें से किन सुझावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।




