नई दिल्ली, 27 मई (वेब वार्ता)। देश में बीते 12 दिनों के दौरान बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, दूध, सोना-चांदी और रोजमर्रा की कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। बढ़ते खर्च के बीच विशेष रूप से मध्यम वर्ग खुद को आर्थिक दबाव में महसूस कर रहा है।
महंगाई का सबसे बड़ा असर ईंधन की कीमतों में दिखाई दे रहा है। पिछले 12 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम कई बार बढ़ाए जा चुके हैं। कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई है, जबकि डीजल की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसके प्रमुख कारण हैं। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय दबाव का हवाला दे रही हैं, लेकिन इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
पेट्रोल और डीजल के बाद सीएनजी उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिल पाई है। हाल के दिनों में सीएनजी के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। कई शहरों में सीएनजी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। इसका असर विशेष रूप से ऑटो और कैब चालकों पर पड़ रहा है, जिनका कहना है कि आय का बड़ा हिस्सा अब ईंधन पर खर्च हो रहा है। बढ़ती लागत के कारण कई स्थानों पर किराया बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है।
महंगाई की मार रसोई तक भी पहुंच चुकी है। दूध कंपनियों ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की है और कई क्षेत्रों में प्रति लीटर दो से चार रुपये तक दाम बढ़े हैं। इसके अलावा ब्रेड, दाल और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। घरेलू उपयोग की इन वस्तुओं के महंगे होने से परिवारों का मासिक खर्च बढ़ गया है और रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है।
शादी के मौसम में सोना और चांदी की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की परेशानी बढ़ाई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और आयात शुल्क से जुड़े कारकों के कारण सोना लगातार महंगा हो रहा है। कई शहरों में सोने का भाव एक लाख रुपये प्रति दस ग्राम के करीब पहुंचने की चर्चा है। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए विवाह और अन्य सामाजिक अवसरों पर आभूषण खरीदना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का प्रभाव केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिसका असर बाजार में सब्जियों, फल, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देने लगता है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि लागत बढ़ने से आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बन रहा है।
महंगाई के इस दौर में मध्यम वर्ग सबसे अधिक दबाव महसूस कर रहा है। एक ओर घर और वाहन की मासिक किस्तें, बच्चों की पढ़ाई और बिजली-पानी जैसे खर्च हैं, वहीं दूसरी ओर रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि पहले जिस आय में पूरे महीने का खर्च आसानी से चल जाता था, अब उसी राशि में संतुलन बनाना मुश्किल हो गया है।
अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक राहत की संभावना सीमित रह सकती है। सरकार हालात पर निगरानी रखने की बात कह रही है, लेकिन फिलहाल बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की बचत और घरेलू आर्थिक योजनाओं को गहराई से प्रभावित किया है।




