नई दिल्ली, 21 मई (वेब वार्ता)। नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा सुरक्षा और फर्जी सूचनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और छात्रों के बीच भ्रम फैलाने वाले नेटवर्क पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था, संभावित जोखिमों की पहचान और समय रहते रोकथाम के उपाय रहे। सरकार ने स्पष्ट किया कि परीक्षा को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसी क्रम में सामाजिक माध्यम मंचों के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग बैठक आयोजित की गई। इसमें मेटा, गूगल और टेलीग्राम सहित प्रमुख मंचों को प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी फर्जी खबरों, पेपर लीक के झूठे दावों और भ्रामक सामग्री पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया। सरकार ने ऐसे संदेशों को छात्रों में घबराहट और अविश्वास फैलाने वाला बताया।
अधिकारियों के अनुसार बड़ी परीक्षाओं से पहले कई टेलीग्राम चैनल और ऑनलाइन समूह अचानक सक्रिय हो जाते हैं। इन मंचों पर कथित पेपर लीक, सनसनीखेज संदेश और बिना पुष्टि वाली सूचनाएं तेजी से प्रसारित की जाती हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कई संदिग्ध कड़ियां छात्रों को स्वचालित बॉट और फर्जी समूहों तक पहुंचाती हैं, जिनका उद्देश्य केवल भ्रम और अफवाह फैलाना होता है।
खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के अनुसार कई संदिग्ध चैनल सीमित संख्या में फोन नंबरों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। इससे संगठित और योजनाबद्ध गतिविधि की आशंका जताई गई है। मामले को गंभीर मानते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने अधिकारियों को ऐसे नेटवर्क की पहचान कर उन्हें तुरंत अवरुद्ध और हटाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का कहना है कि छात्रों के बीच गलत जानकारी और भय फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सामाजिक माध्यम मंचों के समन्वय से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।




