देहरादून, 22 अप्रैल (वेब वार्ता)। पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। इस घटना के जवाब में भारतीय सेना ने 7-8 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की, जिसमें सौ से अधिक आतंकियों के मारे जाने का अनुमान जताया गया।
इस सैन्य अभियान के दौरान देहरादून सहित पूरे उत्तराखंड में उच्च सतर्कता बरती गई थी। सेना के जवान संभावित प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह तैयार थे और किसी भी स्थिति का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैनात किए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, हमले के बाद देश के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि इस आतंकी घटना का कड़ा जवाब दिया जाएगा। सेना को कार्रवाई के लिए पूर्ण स्वतंत्रता दी गई थी, जिसमें समय, स्थान और रणनीति तय करने का अधिकार भी शामिल था।
बताया गया कि ऑपरेशन से पहले सेना ने व्यापक अभ्यास किया था, जिसमें थल, वायु और नौसेना के तीनों अंगों ने भाग लिया। इस अभ्यास का उद्देश्य सीमित युद्ध की स्थिति में किसी भी संभावित बड़े हमले का प्रभावी जवाब देने की तैयारी करना था।
देहरादून में आयोजित इस अभ्यास के दौरान सैनिकों को अल्प सूचना पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने भी पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी थी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह संदेश दिया कि देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी आतंकी चुनौती का जवाब सख्ती से दिया जाएगा।



