मुरादाबाद, 22 अप्रैल (वेब वार्ता)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सौ दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है, लेकिन जिले में इस लक्ष्य की वास्तविकता चिंताजनक नजर आ रही है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,13,795 सक्रिय जॉब कार्डधारकों में से केवल 1,559 मजदूरों को ही 100 दिन का रोजगार मिल पाया, जो कुल संख्या का महज दो प्रतिशत है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, 11,570 मजदूर ऐसे रहे जिनके कार्य दिवस 81 से 99 दिनों के बीच दर्ज किए गए। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में श्रमिक निर्धारित सीमा तक पहुंचने से पहले ही काम से वंचित रह गए।
जिले में विभिन्न विकास कार्यों के तहत मनरेगा मजदूरों को रोजगार दिया गया, जिनमें नाली निर्माण, सड़क निर्माण, चकरोड, तालाब खुदाई, मिट्टी भराई और खड़ंजा निर्माण जैसे कार्य शामिल रहे। इन परियोजनाओं के माध्यम से श्रमिकों को काम उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, हालांकि अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए।
ब्लॉकवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कुंदरकी क्षेत्र में सबसे अधिक 18,393 सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं, जबकि मुरादाबाद ब्लॉक में यह संख्या सबसे कम 5,992 है। सौ दिन रोजगार पाने वाले मजदूरों में भी कुंदरकी ब्लॉक अग्रणी रहा, जहां 431 श्रमिकों को पूरा रोजगार मिला, जबकि छजलैट ब्लॉक में यह संख्या मात्र 32 रही।
विभाग का दावा है कि सृजित मानव दिवस के लक्ष्य को पार कर लिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर आंकड़े इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी में सुधार की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक मजदूरों को पूर्ण रोजगार मिल सके।
यह स्थिति संकेत देती है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के बावजूद ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार की पूरी गारंटी नहीं मिल पा रही है, जिससे योजना के उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं।



