पौड़ी गढ़वाल/लखनऊ, 09 मई (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड में बढ़ते पलायन और बंजर होते खेतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अपने पैतृक गांव पंचूर में आयोजित श्री विष्णु पंचदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पलायन केवल खेती को ही प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों की विरासत को भी धीरे-धीरे समाप्त कर रहा है।
उन्होंने कहा कि लोग गांव, जमीन और अपनी सांस्कृतिक पहचान से दूर होते जा रहे हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने लोगों से अपनी जड़ों, परंपराओं और देवस्थलों को संरक्षित रखने का आह्वान किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज और संस्कृति को जीवित रखने के लिए समय-समय पर दैवीय शक्तियों की पूजा और पुरुषार्थ के कार्य आवश्यक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो खेत कभी फसलों से लहलहाते थे, आज वे झाड़ियों से भर गए हैं। कई गांवों में खेती पूरी तरह बंद हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लोग जंगली जानवरों को खेती छोड़ने का कारण बताते हैं, लेकिन पहले भी गांवों में जंगली जानवर मौजूद थे। उस समय लोग अधिक जागरूक रहते थे और खेती तथा परंपराओं से जुड़े रहते थे।
उन्होंने किसानों को खेती के नए विकल्प अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि यदि पारंपरिक फसलें नुकसान पहुंचा रही हैं तो बागवानी को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पंचूर के निकट पोखरी गांव में बाबा रामदेव द्वारा खुमानी, आड़ू और किन्नू जैसे फलों का सफल उत्पादन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को नई प्रेरणा मिल रही है।
योगी आदित्यनाथ ने मंदिर निर्माण से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर आज विष्णु पंचदेव मंदिर बना है, वहां पहले सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, लेकिन बार-बार जेसीबी मशीन खराब हो रही थी। बाद में पुराने मानचित्र और इतिहास देखने पर पता चला कि वहां पहले देवस्थल हुआ करता था, जहां ग्रामीण पूजा-अर्चना करते थे।
इसके बाद सड़क निर्माण की दिशा बदलने का निर्णय लिया गया और उसी स्थान पर मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। योगी ने कहा कि इसके बाद निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो गया और कोई दुर्घटना भी नहीं हुई। उन्होंने इसे दैवीय आस्था और संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया।
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने गांवों में कम होती धार्मिक परंपराओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बचपन में गांवों में वर्ष में एक बार जागर जरूर होता था, लेकिन अब यह परंपरा कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं की पूजा और जागर की परंपरा गांवों की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम में सतपाल महाराज, चिदानंद सरस्वती मुनि और बाबा रामदेव सहित कई संत एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।




