कौशांबी, 08 मई (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त और जबरन विवाह कराने वाले एक अंतर्जनपदी गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले का खुलासा थाना कोखराज में दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान हुआ।
पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने बताया कि 25 मार्च 2026 को एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की सूचना थाना कोखराज में दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की गई। सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर 22 अप्रैल 2026 को किशोरी को कानपुर से बरामद कर लिया गया।
मेडिकल परीक्षण और बयान के दौरान पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसे बहला-फुसलाकर घर से दूर ले जाया गया और बाद में 70 हजार रुपये में बेच दिया गया। इसके बाद उसकी जबरन शादी कराई गई। विरोध करने पर उसके साथ दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस ने मामले में सुमित कुमार, अनुराधा, मंजू, शाहरुख हुसैन और अंशु जाटव को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी कासगंज, हाथरस, एटा और मैनपुरी जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं। आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन और 13 हजार 150 रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।
पीड़िता ने पूछताछ में बताया कि वह किसी बात से नाराज होकर घर से निकल गई थी और कानपुर पहुंच गई थी। कानपुर रेलवे स्टेशन पर उसकी मुलाकात अंशु नामक युवक से हुई, जिसने उसे अपने भरोसे में लेकर अपने साथ रखा। बाद में वह उसे अपने साथी शाहरुख के कमरे पर ले गया, जहां उसे कई दिनों तक रोका गया।
पीड़िता के अनुसार बाद में अंशु ने अनुराधा नामक महिला की मदद से उसे मंजू देवी को 70 हजार रुपये में बेच दिया। आरोप है कि मंजू देवी ने पैसे देकर किशोरी को खरीदने के बाद उसकी जबरन शादी अपने देवर सुमित से करा दी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि विवाह के बाद उसे कमरे में बंद रखा गया। विरोध करने पर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया, मारपीट की गई और जान से मारने की धमकियां दी गईं।
पुलिस के अनुसार पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मानव तस्करी, खरीद-फरोख्त, जबरन विवाह और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।




