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यूपीआईटीएस में छाया जोया का पुश्तैनी जायका, दोपहर तक खत्म हो रहा स्टॉक; 25 लाख रुपये तक के मिले बल्क ऑर्डर।

यूपीआईटीएस में छाया जोया का पुश्तैनी जायका, दोपहर तक खत्म हो रहा स्टॉक; 25 लाख रुपये तक के मिले बल्क ऑर्डर।
वेब वार्ता
​अमरोहा,27 सितंबर ।ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में अमरोहा के जोया का करीब पांच दशक पुराना पुश्तैनी नमकीन कारोबार अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ‘एक जिला, एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना के तहत हॉल नंबर 16 स्थित फेमस इंडिया कॉर्नर के स्टॉल पर भुजिया सेव की मांग इतनी अधिक है कि प्रतिदिन दोपहर तक सारा स्टॉक खत्म हो रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार ट्रेड शो में अब तक लगभग 20 से 25 लाख रुपये के संभावित बल्क ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं। इस स्टॉल पर न केवल स्थानीय व देशी कारोबारियों की भीड़ उमड़ रही है, बल्कि विदेशी खरीदार भी गहरी रुचि दिखा रहे हैं। जापान की स्नैक्स एवं रिटेल क्षेत्र से जुड़ी महिला कारोबारी शीझू ने फैक्ट्री विजिट के बाद एक पूरे कंटेनर की आपूर्ति में रुचि जताई है, वहीं दुबई, चीन और वियतनाम के व्यापारिक प्रतिनिधियों ने नमकीन के सैंपल लिए हैं। चीनी प्रतिनिधिमंडल सात से आठ हजार रुपये की नमकीन नकद खरीदकर ले गया और आगे बड़े ऑर्डर के लिए बातचीत का आश्वासन दिया है।
​फैसल पाशा द्वारा संचालित इस इकाई में पारंपरिक भुजिया सेव के अलावा बेसन-बूंदी और ड्राई फ्रूट्स के लड्डू भी तैयार किए जाते हैं। हालांकि, हाइजीनिक पैकेजिंग और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया के कारण फिलहाल ट्रेड शो में मुख्य रूप से अजवाइन, मिंट-चिली, हींग-जीरा और काली मिर्च फ्लेवर की भुजिया सेव प्रदर्शित की गई है। स्टॉल पर बिक्री के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं; पहले दिन 35 हजार रुपये (1,340 पैकेट), दूसरे दिन 58 हजार रुपये (1,200 पैकेट) और तीसरे दिन दोपहर तक 76 हजार रुपये की नकद बिक्री दर्ज की गई है। इसके अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा के बड़े मॉल, गाजियाबाद, बंगलूरू की बी2बी कंपनियों तथा हल्दीराम व बीकाजी के वितरकों से भी ऑर्डर मिले हैं।
​वर्ष 1975 में फैसल के दादा द्वारा एनएच-9 के किनारे छह रुपये किलो से शुरू किया गया यह कारोबार अब तीसरी पीढ़ी के हाथों में है। इस इकाई की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक उत्पादन प्रक्रिया है, जहां रेडीमेड बेसन के बजाय साबुत चने और मसालों की पिसाई पारंपरिक पत्थर की चक्की में की जाती है। नमकीन बनाने में पाम ऑयल का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता; यह मूंगफली के तेल में बनती है और विदेशी खरीदारों की मांग पर ऑलिव ऑयल वेरियंट भी तैयार किया जाता है। वर्तमान में एक टन प्रतिदिन की क्षमता वाली इस इकाई से 22 स्थानीय महिलाओं समेत 45 से अधिक कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता केंद्र के उपायुक्त उद्योग अनूप कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि ओडीओसी का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराना है और यूपीआईटीएस में जोया की भुजिया को मिली प्रतिक्रिया सूक्ष्म उद्यमों के लिए बेहद उत्साहजनक है।

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