हरदोई में तुलसीदास की रचनाधर्मिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, सामाजिक समरसता पर हुआ मंथन

लक्ष्मीकान्त पाठक।वेबवार्ता

हरदोई। डॉ. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय, अल्लीपुर, हरदोई एवं अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, अयोध्या (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में ‘समन्वय के कवि गोस्वामी तुलसीदास की रचनाधर्मिता’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों, चिंतकों, पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।
एक नजर में
विषय: तुलसीदास की रचनाधर्मिता और समन्वय की भावना
मुख्य अतिथि: प्रो. अवनीश अवस्थी
मुख्य वक्ता: राज किशोर
मुख्य संदेश: तुलसी साहित्य सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक
सम्मान: मेधावी छात्र-छात्राओं, साहित्यकारों एवं पत्रकारों का सम्मान
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण से हुआ। उदय वीर सिंह ‘उदय’ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। प्रस्तावना रखते हुए डॉ. देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि तुलसीदास ने ज्ञान, भक्ति और कर्म के साथ समाज के विभिन्न वर्गों एवं विचारधाराओं को समन्वय के सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
मुख्य अतिथि प्रो. अवनीश अवस्थी, पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने कहा कि तुलसीदास का समन्वय केवल शैव-वैष्णव परंपराओं तक सीमित नहीं था, बल्कि भाषा, समाज, संस्कृति और दर्शन के स्तर पर भी व्यापक था। उन्होंने कहा कि ‘रामचरितमानस’ केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का अनुपम महाकाव्य है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
मुख्य वक्ता श्री राज किशोर, प्रांत प्रमुख सामाजिक समरसता, अवध प्रांत ने कहा कि तुलसीदास ने विषमताओं से भरे समाज को एकजुट करने का कार्य किया। रामचरितमानस में राम का चरित्र सामाजिक समरसता का श्रेष्ठ उदाहरण है।
विशिष्ट अतिथि ज्ञान प्रकाश ‘आकुल’ एवं श्री प्रख्यात ने काव्य पाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ ने कहा कि तुलसी का साहित्य लोक कल्याण और सामाजिक समरसता की भावना से अनुप्राणित है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मेधावी छात्र-छात्राएं सम्मानित
कार्यक्रम के दूसरे चरण में महाविद्यालय के बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी एवं बीएड के द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र, मेडल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जनपद के वरिष्ठ साहित्यकारों एवं पत्रकारों डॉ. नरेश चंद्र शुक्ला, डॉ. बीएस पांडे, डॉ. ईश्वर चंद्र वर्मा, देश दीपक शुक्ला, अजित्यानंद मणि, डॉ. शीला पांडेय, डॉ. राहुल सिंह, महेश मिश्र, वेद प्रकाश अवस्थी सहित अन्य को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शीर्षेन्दु शील त्रिवेदी ‘विपिन’ ने किया। संचालन श्री राजकुमार सिंह ‘प्रखर’ ने किया। अंत में डॉ. देश दीपक शुक्ला ने अतिथियों, विद्वानों, वक्ताओं, पत्रकारों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान एवं जलपान के साथ हुआ।

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