लक्ष्मीकान्त पाठक
*बेहंदर, हरदोई।*वेबवार्ता) क्षेत्र के मदरसा रहमानुल उलूम सरसंड में बृहस्पति को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 95वीं वर्षगांठ बेहद सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मदरसे के शिक्षकों और अतिथियों ने डॉ. कलाम के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों को संबोधित करते हुए मदरसे के प्रबंधक अशफ़ाक़ुर्रहमान और प्रधानाचार्य मोहयुद्दीन ने डॉ. कलाम के प्रेरक जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे डॉ. कलाम का जीवन सादगी और उच्च विचारों का प्रतीक था। देश के प्रति उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। शिक्षक इरिंद, सुखविंदर, अम्बरीष कुमार और अर्पिता देवी ने बच्चों को डॉ. कलाम के पदचिह्नों पर चलने और शिक्षा के माध्यम से देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।वक्ताओं ने बच्चों को डॉ. कलाम के अद्वितीय व्यक्तित्व के बारे में बताते हुए कहा कि वे असाधारण सादगी, अदम्य हौसले और सच्चे राष्ट्रप्रेम की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने बच्चों को कलाम साहब के प्रसिद्ध संदेश को याद दिलाते हुए प्रेरित किया कि “सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।” वक्ताओं ने बच्चों को डॉ. कलाम के पदचिह्नों पर चलने और शिक्षा के माध्यम से देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर ‘मेरा युवा भारत’ युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक आसिम अली भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और युवाओं को देश सेवा का संकल्प दिलाया।
मिसाइल मैन डॉ. कलाम की 95वीं जयंती पर मदरसा रहमानुल उलूम में दी गई श्रद्धांजलि

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