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श्रीराम के अग्निबाण से हुआ रावण का अंत, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा रामलीला मैदान

65 फिट ऊंचे रावण के पुतले के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी धू-धू कर जले, आकर्षक आतिशबाजी ने बांधा समां

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बहराइच। अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अहंकार पर मर्यादा की विजय का संदेश देते हुए विजयदशमी का पर्व जनपद में श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। शहर के रामलीला मैदान में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और लंकापति रावण के बीच हुए भीषण युद्ध के सजीव मंचन ने दर्शकों को रामायण के उस ऐतिहासिक प्रसंग से जोड़ दिया, जब धर्म की रक्षा के लिए प्रभु श्रीराम ने अधर्म के प्रतीक रावण का संहार किया। जैसे ही श्रीराम ने अग्निबाण चलाया, लगभग 65 फिट ऊंचा रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा। साथ ही मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का भी दहन किया गया। आसमान में गूंजती आतिशबाजी और मैदान में उठते जय श्रीराम के जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
श्री मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम लीला कमेटी (रजि.), बहराइच के तत्वावधान में आयोजित दशहरा महोत्सव में मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों ने रामायण के युद्ध प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया। लीला के दौरान रावण ने युद्ध में विजय की कामना से भगवान शिव की आराधना की, वहीं दूसरी ओर धर्म की स्थापना के लिए श्रीराम युद्धभूमि में उतरे। भीषण संग्राम में पहले मेघनाद और कुंभकर्ण का वध हुआ। इसके बाद श्रीराम और रावण के बीच निर्णायक युद्ध शुरू हुआ। रावण बार-बार अपने कटे सिरों के साथ फिर खड़ा होता रहा, लेकिन विभीषण के बताए रहस्य के अनुसार श्रीराम ने उसके नाभि में स्थित अमृत को लक्ष्य कर बाण चलाया। अमृत सूखते ही रावण धराशायी हो गया और उसके अंत के साथ ही अधर्म के अभिमान का भी पतन हो गया।
रावण के धराशायी होते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर तक लोग मैदान में डटे रहे और विजय के इस उत्सव के साक्षी बने। सुरक्षा व्यवस्था के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। ग्रामीण अंचलों में भी दशहरा पर्व की धूम रही।

(इनसेट)
अहंकार का त्याग और मर्यादा का संदेश

दशहरा महोत्सव केवल रावण के पुतले के दहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को आत्ममंथन का संदेश भी दिया। रामायण का प्रसंग याद दिलाता है कि रावण जैसा प्रकांड विद्वान भी अहंकार, अधर्म और परस्त्री के प्रति कुदृष्टि के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। वहीं भगवान श्रीराम ने सत्य, संयम, करुणा और मर्यादा के बल पर विजय प्राप्त की। पर्व का संदेश यही रहा कि मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य बुराइयों का त्याग कर सदाचार को अपनाए।
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर श्री रवि गिरी जी महाराज, प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा, पूर्व सांसद अक्षयवर लाल गोंड, विभाग प्रचारक कृष्ण कुमार, प्रांतीय समरसता प्रमुख राज किशोर, जिला प्रचारक अजय कुमार, नगर कार्यवाह भूपेंद्र, भाजपा जिलाध्यक्ष बृजेश पाण्डेय, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव, एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट तथा सीओ सिटी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए समाज में सद्भाव, नैतिकता और मर्यादा को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन रामलीला कमेटी के अध्यक्ष श्याम करण टेकड़ीवाल ने किया। इस अवसर पर जितेंद्र अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, राहुल रॉय, राकेश चंद्र श्रीवास्तव, मनोज गुप्ता, मीडिया प्रभारी सचिन श्रीवास्तव, कमल शेखर गुप्ता, अंशुमान यज्ञसैनी, अशोक सैनी, जितेंद्र प्रताप सिंह जीतू, श्रवण शुक्ला, विनय जैन, वासु साहू, राहुल दीक्षित, सुशील कुमार, राकेश मित्तल, राजीव सिंह, हर्षित राज श्रीवास्तव, रणविजय सिंह, नन्हे लाल लोधी, विपिन यज्ञसैनी, वैभव जैन, दाऊ जी सोनी, हरिश्चंद्र गुप्ता, अमित शर्मा, एसपी मिश्रा, केके मिश्रा, केके सक्सेना, आनंद गुप्ता, प्रकाश गुप्ता, सुमित टेकड़ीवाल, राघव टेकड़ीवाल, सौरभ मिश्रा, सूरज केवट, कुंदन लोधी, निशा शर्मा, हेमा निगम और उर्मिला शुक्ला सहित हजारों रामभक्त मौजूद रहे।

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आतिशबाजी ने मोहा मन, जय श्रीराम से गूंजता रहा मैदान

रावण दहन के बाद हुई भव्य आतिशबाजी दशहरा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही। आसमान में बिखरी रंग-बिरंगी रोशनी के बीच रामलीला मैदान देर तक जय श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा। लोगों ने परिवार सहित पर्व का आनंद लिया और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक इस आयोजन को उल्लास के साथ मनाया।

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