रामपुर, 26 जुलाई (वेब वार्ता)। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने के प्रशासनिक आदेश के विरोध में समाजवादी पार्टी का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को रामपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी को ज्ञापन सौंपकर ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त करने तथा छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए विधिसम्मत समाधान निकालने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में समाजवादी पार्टी के कई सांसद शामिल थे। कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया और वहां धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं से मुलाकात की। नेताओं ने छात्रों को आश्वस्त किया कि उनके शैक्षणिक भविष्य की रक्षा के लिए पार्टी हर स्तर पर उनके साथ खड़ी रहेगी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से भी चर्चा की और फिर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है और इससे हजारों विद्यार्थियों तथा शिक्षकों का भविष्य जुड़ा हुआ है। उनका कहना था कि भवनों को ध्वस्त करने के बजाय वैधानिक प्रक्रिया के तहत समाधान तलाशा जाना चाहिए।
ज्ञापन पर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय सागर सहित सांसद जावेद अली खान, हरेंद्र मलिक, रुचि वीरा, इकरा हसन, नीरज मौर्य, जियाउर्रहमान बर्क, देवेश शाक्य और राम शिरोमणि वर्मा के हस्ताक्षर हैं। प्रतिनिधिमंडल में रामपुर के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी का नाम भी शामिल था, हालांकि वह कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।
मुरादाबाद से सांसद रुचि वीरा ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय केवल भवनों का समूह नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का केंद्र है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस शैक्षणिक संस्थान को बचाने के लिए लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।
संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रशासनिक कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस विषय को संसद में उठाने का प्रयास करेंगे।
कैराना से सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि यदि भवनों के नक्शे को आधार बनाकर कार्रवाई की जा रही है तो ऐसे अन्य मामलों में भी समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए।
राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने सरकार पर शिक्षा विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के विरुद्ध जारी आदेश छात्र हित में नहीं है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। वहीं सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार का ध्यान नए शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और शिक्षा को बढ़ावा देने पर होना चाहिए।
समाजवादी पार्टी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के निर्माण के समय संबंधित क्षेत्र ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में था और उस समय निर्माण अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि संबंधित क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण के अधीन आया, जबकि विश्वविद्यालय का निर्माण उससे पहले पूरा हो चुका था। पार्टी ने प्रशासन से छात्र हित और जनहित को ध्यान में रखते हुए ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त करने तथा वैधानिक प्रक्रिया के तहत समाधान निकालने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि जौहर विश्वविद्यालय को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और समाजवादी पार्टी के विरोध के बाद यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है। प्रशासन की ओर से इस विषय पर विधिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी इसे छात्र हित और शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न बता रही है।




