नई दिल्ली, 26 जुलाई (वेब वार्ता)। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक कर विभागीय कार्यों और आगामी प्राथमिकताओं पर चर्चा की। उनके पास पहले से नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय सहित अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारियां भी बनी रहेंगी।
शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने अधिकारियों के साथ मंत्रालय के प्रमुख कार्यों, परीक्षा प्रणाली, शिक्षा सुधार तथा प्रशासनिक तैयारियों की प्रारंभिक समीक्षा की। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मंत्रालय की प्राथमिकता शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने पर रहेगी।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल प्रह्लाद जोशी संगठन और संसदीय कार्यों में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ क्षेत्र से की और वर्ष 2004 में पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ कायम रखी।
प्रह्लाद जोशी वर्ष 2012 में भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। केंद्र सरकार में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभाला है। वर्ष 2019 में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खनन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्तमान में वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी कार्यभार संभाल रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के साथ ही उनके सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां मानी जा रही हैं। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद से जुड़े सुधारों को गति देना तथा परीक्षा प्रक्रिया में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना शामिल है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की प्रक्रिया में भी बदलाव पर विचार किया जा रहा है। चर्चाओं के अनुसार भविष्य में कुछ परीक्षाओं को संगणक आधारित स्वरूप में आयोजित करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ बनाने तथा परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर मंथन किया जा रहा है। हालांकि इन प्रस्तावित बदलावों पर अभी आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा मंत्रालय के नए नेतृत्व के सामने छात्रों का विश्वास मजबूत करना, परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना और शिक्षा सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रहेगा।




