लक्ष्मीकान्त पाठक
हरदोई( वेबवार्ता) उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का दंभ भरने वाली समाजवादी पार्टी अपनों के ही बयानों से कटघरे में खड़ी हो गई है। हरदोई की निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती पीके वर्मा पर सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शराफत अली की कथित विवादित टिप्पणी ने जिले के सियासी पारे को उबाल पर ला दिया है। मामला अब महज एक बयानबाजी तक सीमित न रहकर महिला सम्मान, दलित स्वाभिमान और संवैधानिक अधिकारों की सीधे आर-पार की जंग में तब्दील हो चुका है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक कथित बयान में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शराफत अली द्वारा आरक्षण व्यवस्था, दलित समाज और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा की सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर आपत्तिजनक व अपमानजनक टिप्पणी किए जाने का दावा किया जा रहा है। वायरल वीडियो व बयानों में शराफत अली ने कथित तौर पर आरक्षण को लेकर तंज कसते हुए जनप्रतिनिधि की सामाजिक स्थिति पर बेहद ओछी भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे जिले के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई और तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती पीके वर्मा ने इसे महिला सम्मान और दलित समाज की गरिमा पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी महिला की सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर नीचा दिखाने वाली भाषा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की कृपा या खैरात नहीं है, बल्कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा दिया गया संवैधानिक अधिकार है। शिक्षक से राजनीति के शीर्ष तक पहुंचीं प्रेमावती वर्मा ने आरोपी सपा नेता के खिलाफ पुलिस प्रशासन से मामले का संज्ञान लेते हुए SC/ST एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।विवाद सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने सपा को उसके ही गढ़ में घेरने के लिए मोर्चा खोल दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने सोशल मीडिया पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए सपा के ‘पीडीए’ एजेंडे के परखच्चे उड़ाए। उन्होंने कहा कि सपा का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) प्रेम महज एक चुनावी छलावा है, जिसकी आड़ में केवल परिवारवाद की राजनीति चलाई जा रही है। एक चुनी हुई दलित महिला जनप्रतिनिधि के प्रति ऐसी भाषा का इस्तेमाल सपा नेतृत्व और उसके नेताओं की दलितों व महिलाओं के प्रति असली सोच को उजागर करता है। उन्होंने चेताया कि आने वाले विधानसभा चुनावों में दलित समाज और महिला वर्ग इस अपमान का करारा राजनीतिक हिसाब लेगा और सपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।हरदोई में आगामी चुनावों की सरगर्मियों के बीच सामने आए इस विवाद ने सपा को रक्षात्मक मुद्रा में धकेल दिया है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को सपा के ‘दलित विरोधी’ चेहरे के तौर पर भुनाने में जुट गई है, वहीं सपा के सामने अपने पीडीए वोटबैंक को साधे रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल, इस पूरे मामले में अंतिम कानूनी रुख पुलिस जांच और डिजिटल साक्ष्यों व वायरल ऑडियो-वीडियो की फोरेंसिक पुष्टि के बाद तय होगा, लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा हरदोई की सियासत को और गरमाएगा।
हरदोई: दलित महिला जिला पंचायत अध्यक्ष पर सपा नेता की विवादित टिप्पणी, मचा सियासी बवंडर

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