वेब वार्ता
अमरोहा, 30 सितंबर। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में वर्ष 2019 में दिल्ली रोड स्थित श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय में बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए प्रस्तुत की गई 12वीं की अंकतालिका का मामला छह साल बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान सामने आया है। क्राइम ब्रांच द्वारा विश्वविद्यालय से शैक्षणिक अभिलेख मांगे जाने के बाद संबंधित अंकतालिका का जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से सत्यापन कराया गया, जिसमें बोर्ड ने उसे अपने अभिलेखों में कूटरचित करार दिया है। बोर्ड से मिली इस जानकारी के बाद क्राइम ब्रांच ने विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत कराया, जिसके आधार पर रजबपुर पुलिस ने 28 सितंबर को पूर्व छात्र दीपक नंदा के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने अब यह सवाल प्रमुखता से खड़ा कर दिया है कि जिस अंकतालिका के आधार पर वर्ष 2019 में प्रवेश दिया गया, उसका सत्यापन उस समय किस स्तर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया था।
पुलिस सूत्रों ने बुधवार को बताया कि दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी दीपक नंदा ने वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय के बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। प्रवेश के दौरान उसने जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की 12वीं की अंकतालिका जमा की थी। उसका नामांकन क्रमांक एसएचएस19बी03030096 दर्ज है और उसने वर्ष 2024 में अपना पाठ्यक्रम पूरा कर लिया था।
किसी अन्य मामले की जांच के सिलसिले में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 94 के तहत विश्वविद्यालय से छात्र के शैक्षणिक अभिलेख मांगे थे। विश्वविद्यालय द्वारा 9 सितंबर को दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद क्राइम ब्रांच ने अंकतालिका के सत्यापन के लिए उसे जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन भेजा। बोर्ड की ओर से 19 सितंबर को भेजी गई रिपोर्ट में उक्त अंकतालिका को अपने अभिलेखों के अनुसार फर्जी व कूटरचित बताया गया। इसके बाद 23 सितंबर को क्राइम ब्रांच ने पत्र भेजकर विश्वविद्यालय को वस्तुस्थिति से अवगत कराया।
मामले की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार की तहरीर पर 24 सितंबर को पुलिस में शिकायत दी गई। रजबपुर पुलिस ने 28 सितंबर को मुकदमा दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक राजेंद्र कुमार को सौंपी गई है और पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी बीएससी ऑप्टोमेट्री के कुछ विद्यार्थियों ने पाठ्यक्रम की मान्यता और डिग्री के पंजीकरण को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। वह मामला अदालत तक पहुंचा था और अदालत के निर्देश पर पुलिस ने विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था, हालांकि उसका वर्तमान प्रकरण से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। शिक्षण संस्थान में वीवीआईपी मूवमेंट पर अभिभावकों का एतराज बना रहता है।
वर्तमान मामले में सबसे गंभीर पहलू प्रवेश के समय प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच प्रणाली से जुड़ा है। यदि किसी विद्यार्थी के दाखिले के लिए बोर्ड की अंकतालिका अनिवार्य दस्तावेज थी, तो उस समय उसके सत्यापन की क्या प्रक्रिया अपनाई गई और छह वर्ष बाद बाहरी एजेंसी की जांच में मामला उजागर क्यों हुआ, यह बात अब पुलिस जांच के साथ-साथ विश्वविद्यालय की प्रवेश व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल मामला दर्ज कर लिया गया है और दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति व संबंधित पक्षों की भूमिका का अंतिम निर्धारण पुलिस विवेचना पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच में छह साल के बाद एलएलबी की अंकतालिका पर मुकदमा
- Advertisement -



