सोनीपत (राजेश आहूजा) सोनीपत शहर की लगातार बदहाल होती सड़कों, जगह-जगह बने गड्ढों, जाम, पार्किंग अव्यवस्था और यातायात व्यवस्था को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं ‘अन्याय के विरुद्ध न्याय युद्ध मंच’ के संस्थापक देवेंद्र गौतम ने सरकार और प्रशासन पर तीखा व्यंग्य करते हुए सड़क पर उतरकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
इस दौरान देवेंद्र गौतम ने ‘भाजपा का विकास’ लिखी प्रतीकात्मक पोशाक पहनकर शहर की सड़कों की वास्तविक स्थिति को जनता के सामने रखने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि आज सोनीपत में स्थिति यह है कि जहां आम आदमी को 10 मिनट में पहुंच जाना चाहिए, वहां सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था के कारण 30-40 मिनट तक लग रहे हैं। इसका सीधा असर आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापारियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और मरीजों पर पड़ रहा है।
देवेंद्र गौतम ने कहा कि शहर में लगातार सड़कें बनती हैं, फिर कुछ ही समय बाद टूट जाती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की जांच कौन करता है और खराब निर्माण के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है? या फिर नए टेंडर लगाकर उसकी आड़ में कमीशन खोरी जारी है?
देवेन्द्र गौतम ने सवाल किया अगर कोई सड़क तीन-चार महीने में टूट जाती है तो क्या केवल जनता की किस्मत खराब है, या सड़क बनाने वाले ठेकेदार और उसकी गुणवत्ता जांचने वाले अधिकारियों की भी कोई जिम्मेदारी है?
गौतम ने मांग की कि जिन सड़कों का निर्माण हाल के वर्षों में हुआ है, उनकी थर्ड पार्टी क्वालिटी जांच और सामग्री की जांच कराई जाए तथा कमी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाये।
गौतम ने कहा कि हेलमेट पहनना और यातायात नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन यदि सड़क पर गड्ढे, खराब मार्किंग और अव्यवस्थित यातायात हो तो सड़क सुरक्षा का पूरा भार केवल वाहन चालक पर नहीं डाला जा सकता। उन्होंने कहा जहां संकेतक और स्पष्ट सफेद पट्टी तक नहीं है, वहां कैमरे से चालान जरूर दिखाई देता है। सवाल यह है कि सड़क की सुरक्षा व्यवस्था कौन देखेगा? उन्होंने ट्रैफिक पुलिस से भी मांग की कि केवल चालान व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय जाम हटाने, अवैध पार्किंग नियंत्रित करने और यातायात को सुचारु करने पर भी प्रभावी कार्रवाई की जाए।
देवेंद्र गौतम ने कहा कि खराब सड़क और जाम केवल असुविधा का विषय नहीं है। आपात स्थिति में एंबुलेंस को समय पर रास्ता नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। उन्होंने कहा कि मामा-भांजा चौक के आसपास दिल्ली रोड, ट्रक यूनियन क्षेत्र, जिमखाना क्लब के आसपास, महाराणा प्रताप चौक तथा अन्य प्रमुख मार्गों की स्थिति प्रशासन के सामने तत्काल रखी जानी चाहिए और संबंधित स्थानों का भौतिक निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
गौतम ने कहा कि सड़कें टूटती हैं, फिर उनकी मरम्मत होती है और कुछ समय बाद फिर वही स्थिति सामने आ जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में सार्वजनिक धन खर्च होता है। उन्होंने कहा जनता टैक्स इसलिए नहीं देती कि एक ही सड़क पर बार-बार टेंडर निकलें, सड़क बने, टूटे और फिर जनता उसी गड्ढे में अपना वाहन लेकर चले। हर रुपये की जवाबदेही होनी चाहिए।
देवेंद्र गौतम ने व्यंग्य करते हुए कहा कि हम अक्सर भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने की बात करते हैं, लेकिन आज भी आम आदमी सड़क, पानी, बिजली, यातायात और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा शहर का विकास सिर्फ बड़े-बड़े पोस्टर और भाषणों में नहीं, सड़क पर दिखाई देना चाहिए। जनता को भाषण नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए।
देवेंद्र गौतम की मांगें
1. सोनीपत की प्रमुख जर्जर सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
2. हाल में बनी और टूट चुकी सड़कों की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच हो।
3. घटिया निर्माण मिलने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
4. प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त रोड मार्किंग और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं।
5. अव्यवस्थित पार्किंग के लिए उचित वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था बनाई जाए।
6. ट्रैफिक पुलिस केवल चालान तक सीमित न रहे, बल्कि जाम की समस्या का भी समाधान करे।
7. एंबुलेंस एवं आपातकालीन वाहनों के लिए प्रमुख मार्गों पर सुगम आवागमन सुनिश्चित किया जाए।
देवेंद्र गौतम ने कहा सोनीपत की जनता ने जनप्रतिनिधियों को इसलिए चुना है कि शहर की सड़कें बेहतर हों, यातायात सुचारु हो और बुनियादी सुविधाएं मिलें। अब जनता को यह जवाब चाहिए कि बदहाल सड़कों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
बदहाल सड़कों पर बैठा ‘भाजपा का विकास’ सोनीपत की सड़कों ने खोली विकास के दावों की पोल : देवेंद्र गौतम

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