भोपाल | शिक्षा डेस्क | वेब वार्ता
Barkatullah University के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव फिलहाल मध्य प्रदेश शासन स्तर पर लंबित है। भोपाल स्थित विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा संस्थान का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में विश्वविद्यालय फिलहाल अपने वर्तमान नाम बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से ही संचालित होता रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और अब अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।
- बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव शासन में लंबित।
- कार्यपरिषद पहले ही प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है।
- राज्य सरकार की अधिसूचना आने तक वर्तमान नाम ही रहेगा।
- प्रस्ताव में “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” नाम सुझाया गया है।
- नाम परिवर्तन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।
- छात्र संगठनों और विभिन्न पक्षों ने प्रस्ताव पर अलग-अलग राय व्यक्त की है।
Barkatullah University के नाम परिवर्तन का मामला क्या है?
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार नाम परिवर्तन से संबंधित प्रस्ताव राज्य शासन को विचारार्थ भेजा जा चुका है। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। जब तक सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक विश्वविद्यालय का नाम यथावत रहेगा।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव समर बहादुर सिंह ने बताया कि यह प्रस्ताव पूर्व कुलपति के कार्यकाल में तैयार किया गया था और शासन को अंतिम निर्णय के लिए भेजा गया है।
विरोध और समर्थन दोनों सामने आए
नाम परिवर्तन के प्रस्ताव के बाद भोपाल में छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन करते हुए पैदल मार्च निकाला और प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। दूसरी ओर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इस विषय पर अपने-अपने पक्ष रखे।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव मोहम्मद जहीर ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा विभाग को ज्ञापन देकर प्रस्ताव निरस्त करने की मांग की। उनका कहना था कि मौलाना बरकतउल्ला देश के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में रहे हैं और उनके नाम को हटाना उनके योगदान का सम्मान कम करने जैसा होगा।
| मुख्य तथ्य | विवरण |
|---|---|
| वर्तमान नाम | बरकतउल्ला विश्वविद्यालय |
| प्रस्तावित नाम | वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय |
| प्रस्ताव की स्थिति | शासन स्तर पर लंबित |
| कार्यपरिषद | प्रस्ताव स्वीकृत |
| अंतिम निर्णय | मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिया जाना है |
विश्वविद्यालय का इतिहास
वर्ष 1970 में इस संस्थान की स्थापना भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी। बाद में वर्ष 1988 में महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में इसका नाम बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया।
मौलाना बरकतउल्ला भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल थे। उन्होंने विदेशों में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अभियान चलाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आजादी के समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे गदर आंदोलन से भी जुड़े रहे।
सरकारी निर्णय का इंतजार
फिलहाल नाम परिवर्तन का प्रस्ताव विचाराधीन है और इस संबंध में कोई अंतिम सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए विश्वविद्यालय की सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियां वर्तमान नाम से ही संचालित होती रहेंगी।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा।




