रायपुर, 27 मई (वेब वार्ता)। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ और बस्तर के दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में दशकों तक निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। इस उपलब्धि पर प्रदेशभर में खुशी की लहर है और इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले ने बस्तर के माओवादी प्रभावित और अत्यंत दुर्गम वनांचलों में तीन दशक से अधिक समय तक चिकित्सा और सामाजिक सेवा को अपना जीवन समर्पित किया है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने आदिवासी समाज तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का कार्य किया और हजारों लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगाई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोडबोले दंपति को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान अबूझमाड़ और बस्तर की सेवा का सच्चा प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा और मानवता की मिसाल पेश करने वाले इस दंपति को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोडबोले दंपति ने वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। बस्तर के बारसूर जैसे दुर्गम वन क्षेत्रों में रहकर उन्होंने न केवल निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता और जनविश्वास को भी मजबूत किया। कुपोषण से लड़ाई, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य चेतना विकसित करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
विष्णुदेव साय ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन हालात के बावजूद जिस प्रतिबद्धता के साथ उन्होंने समाज के सबसे दूरस्थ और जरूरतमंद लोगों के बीच काम किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके अनुसार यह सम्मान सेवा, करुणा और राष्ट्र निर्माण की भावना को और सशक्त करेगा।
वहीं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी गोडबोले दंपति को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि मानव सेवा, समर्पण और करुणा की उस भावना का सम्मान है, जिसने हजारों आदिवासी परिवारों के जीवन में आशा की नई किरण जगाई है।
ओपी चौधरी ने कहा कि बस्तर जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना आसान नहीं था, लेकिन गोडबोले दंपति ने दशकों तक इस चुनौती को स्वीकार किया और आदिवासी समाज के स्वास्थ्य सुधार तथा कुपोषण से लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बच्चों और ग्रामीण समुदाय के बेहतर भविष्य के लिए इस दंपति का समर्पण समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।
गोडबोले दंपति को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान उन अनगिनत सेवा कार्यों की पहचान माना जा रहा है, जो उन्होंने चुपचाप और निःस्वार्थ भाव से समाज के सबसे वंचित वर्गों के बीच रहकर किए। उनकी कहानी समर्पण, संवेदना और मानवता की मिसाल के रूप में लंबे समय तक याद की जाएगी।




