सार
जो रूट के टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के सर्वाधिक रन के रिकॉर्ड के करीब पहुंचने पर मास्टर ब्लास्टर ने उनकी तारीफ की है। सचिन ने कहा कि रूट की प्रतिभा उन्हें 2012 में उनके पहले टेस्ट में ही नजर आ गई थी। उन्होंने वनडे क्रिकेट में 25-25 ओवर की दो पारियां कराने का सुझाव भी दोहराया।

विस्तार
जो रूट ने दिसंबर 2012 में भारत के खिलाफ नागपुर टेस्ट से अपने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर की शुरुआत की थी। उस मुकाबले में सचिन तेंदुलकर भी भारतीय टीम का हिस्सा थे। रूट ने पहली पारी में 229 गेंदों पर 73 रन बनाए थे, जबकि दूसरी पारी में वह 20 रन बनाकर नाबाद रहे थे। यह मुकाबला ड्रॉ रहा था। सचिन से उनके पसंदीदा गैर-भारतीय बल्लेबाजों के बारे में भी पूछा गया। इस पर उन्होंने इंग्लैंड के जो रूट और हैरी ब्रूक के साथ ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ का नाम लिया।
सचिन ने वनडे क्रिकेट के प्रारूप में बदलाव का अपना सुझाव भी दोहराया। उनका मानना है कि 50 ओवर के मुकाबले को दो हिस्सों में बांटकर खेला जाना चाहिए। इसके तहत प्रत्येक टीम को 25-25 ओवर की दो पारियों में बल्लेबाजी करने का मौका मिले। हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि पूरी 50 ओवर की अवधि में टीम के 10 विकेट ही होने चाहिए और पूरे मुकाबले में एक ही गेंद का इस्तेमाल किया जाए। इससे बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। सचिन के मुताबिक, इससे दोनों टीमों को ओस की परिस्थितियों में बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने का मौका भी मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘मेरा सुझाव आसान है। 50 ओवर को 25-25 ओवर की दो पारियों में बांट दिया जाए। लेकिन पूरे 50 ओवर के लिए 10 विकेट ही रहें और एक ही गेंद का इस्तेमाल हो। इससे बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच मुकाबला बना रहेगा और दोनों टीमों को ओस में बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने का मौका मिलेगा। इससे दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनेगा। गेंदबाज खत्म होने से पहले हमें कुछ करना होगा।’




